बरगी डैम में हुआ क्रूज हादसा अब सिर्फ एक दुर्घटना नहीं रहा यह एक ऐसी त्रासदी बन गया है जिसने पूरे देश को भीतर तक झकझोर दिया है।
जबलपुर की शांत शाम अचानक उस वक्त मातम में बदल गई, जब मौसम ने अचानक करवट ली। तेज आंधी और बदलते हालात के बीच सैलानियों से भरा क्रूज कुछ ही पलों में बेकाबू होकर पानी में डूब गया।
इस हादसे में अब तक 9 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 22 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। लेकिन कई परिवार अब भी अपने अपनों की तलाश में उम्मीद और डर के बीच खड़े हैं।
सबसे दर्दनाक तस्वीर उस वक्त सामने आई, जब राहत दल को एक मां और उसके छोटे बेटे का शव मिला दोनों एक-दूसरे से लिपटे हुए। यह दृश्य सिर्फ एक तस्वीर नहीं, बल्कि उस मां के आखिरी संघर्ष की कहानी है, जिसने मौत के सामने भी अपने बच्चे को नहीं छोड़ा, मानो एक मां अपने बच्चे को बचा लेना चाहती है।

रातभर चले रेस्क्यू ऑपरेशन में NDRF, SDRF, सेना के जवानों और स्थानीय गोताखोरों ने मिलकर लोगों को बचाने की हर संभव कोशिश की। तेज बहाव और तकनीकी चुनौतियां राहत कार्यों पर बाधा डाल रही थी।
इस दर्दनाक हादसे के बाद अब कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं
- क्या मौसम की चेतावनी को नजरअंदाज किया गया?
- क्या सुरक्षा इंतजाम पर्याप्त थे?
- और क्या इस हादसे को रोका जा सकता था?
आज जबलपुर शोक में डूबा हुआ है। यह घटना सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि एक ऐसी याद बन गई है जो लंबे समय तक लोगों के दिलों में दर्द बनकर रहेगी।



