रायपुर। राजधानी में मिलावटी पनीर का कारोबार लगातार फैलता ही जा रहा है। खाद्य विभाग ने पिछले एक वर्ष के दौरान अलग-अलग जगहों पर छापेमारी करते हुए कुल 15,090 किलो से अधिक नकली पनीर बरामद किया, लेकिन कार्रवाई उतनी सख्त नहीं हुई जितनी होनी चाहिए थी। हालत यह है कि बड़ी मात्रा में केमिकल से तैयार यह “सफेद ज़हर” जब्त तो किया जाता है, लेकिन फैक्ट्रियां जल्द ही मामूली जुर्माना देकर फिर से शुरू हो जाती हैं।
सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि पकड़े गए पनीर में दूध का बिल्कुल भी उपयोग नहीं किया जाता था। जांच में सामने आया कि यह पनीर स्कीम्ड मिल्क पाउडर, सिंथेटिक तेल, डालडा, हाइड्रोक्लोरिक एसिड और अन्य रसायनों को मिलाकर बनाया जा रहा था। यह मिश्रण स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है और इसके सेवन से फूड पॉयजनिंग, लीवर डैमेज और त्वचा संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
पिछले एक साल में जिन स्थानों से सबसे अधिक नकली पनीर मिला उनमें कबीर नगर से 755 किलो, भाठागांव–शंकर नगर–बीरगांव क्षेत्र से 8,000 किलो से ज्यादा, भाठागांव फैक्ट्री से करीब 700 किलो, भाठागांव फैक्ट्री व रेलवे स्टेशन से 1,535 किलो, बीरगांव फैक्ट्री से 2,500 किलो और गोकुलनगर से 1,000 किलो नकली पनीर जब्त किया गया। इन सभी मिलाकर 15,090 किलो से अधिक नकली पनीर बाजार में पहुँचने से पहले रोक दिया गया।
कार्रवाई की प्रक्रिया हर बार लगभग एक जैसी ही रहती है—छापा पड़ता है, फैक्ट्री सील होती है, सैंपल लैब भेजे जाते हैं और एक महीने बाद रिपोर्ट कोर्ट पहुंचती है। लेकिन यहां भी गंभीर फूड फ्रॉड की जगह सिर्फ “गंदगी पाए जाने” का मामला बनाया जाता है, जिससे फैक्ट्री मालिकों पर केवल छोटा जुर्माना लगाकर उन्हें फिर से काम शुरू करने की अनुमति दे दी जाती है। यही वजह है कि ये फैक्ट्रियां बार-बार पकड़े जाने के बावजूद चालू रहती हैं।
नकली पनीर से बचने के लिए कुछ सरल पहचान जरूरी हैं। असली पनीर सफेद या क्रीमी दिखता है, जबकि नकली पनीर हल्का पीला और ज्यादा चमकीला नजर आता है। असली पनीर दानेदार और मुलायम होता है, जबकि नकली रबर जैसा चिकना होता है। असली पनीर में ताजी खुशबू होती है, जबकि नकली में केमिकल जैसी गंध आती है। पानी में डालने पर असली पनीर नहीं घुलता, पर नकली पनीर जल्दी गल जाता है। इसके अलावा उबाले पनीर पर आयोडीन टिंचर डालने पर यदि रंग नीला पड़ जाए, तो वह नकली माना जाता है।







