महासमुंद जिले के तुमगांव क्षेत्र में पिछले पांच वर्षों से चल रहा किसान आंदोलन अब एक अहम मोड़ पर पहुंच गया है। छत्तीसगढ़ संयुक्त किसान मोर्चा और सर्व छत्तीसगढ़िया किसान समाज के बैनर तले किसान लगातार अवैध गतिविधियों और सरकारी उदासीनता के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं।
हाल ही में आयोजित जनदर्शन कार्यक्रम में जिलाधीश विनय लंगेह ने किसानों की शिकायतों को सही मानते हुए स्वीकार किया कि संबंधित अवैध कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की गई है। साथ ही उन्होंने एसडीएम महासमुंद द्वारा की गई कार्रवाई के दस्तावेज चार दिनों के भीतर किसानों को उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए हैं।
किसानों का आरोप है कि “करणी कृपा प्राइवेट लिमिटेड” नामक कंपनी सरकारी जमीन पर अवैध तरीके से काम कर रही थी। इसके अलावा, खल्लारी माता तक चलने वाले रोपवे में तकनीकी खामियों के बावजूद संचालन जारी रखने को लेकर भी किसानों ने भाजपा सरकार पर सवाल उठाए हैं।
इस पूरे मामले में किसानों के प्रतिनिधि धर्मेंद्र यादव, नाथूराम सिंह, अशोक कश्यप और बृज बिहारी साहू सहित अन्य लोग जनदर्शन में शामिल हुए। उन्होंने प्रशासन के सामने अपनी मांगों को मजबूती से रखा।
इसी बीच, छत्तीसगढ़ी महतारी की स्थापना को लेकर आंदोलनकारियों को तुमगांव थाने में गिरफ्तार किए जाने से स्थिति और तनावपूर्ण हो गई है। किसानों का कहना है कि इस मामले में कलेक्टर और तहसीलदार की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है।
आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि केवल कागजी कार्रवाई की गई और मौके पर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो वे खुद मैदान में उतरकर कार्रवाई करेंगे।
किसानों ने ऐलान किया है कि वे 16 अप्रैल को “छत्तीसगढ़ी महतारी” को लेकर दोबारा पहुंचेंगे और उसी दिन आंदोलन की दिशा तय की जाएगी।
किसान नेताओं का कहना है कि पिछले पांच वर्षों में कांग्रेस और भाजपा दोनों ही सरकारों ने इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं लिया और इसे एक “व्यापार” की तरह चलाया गया। उन्होंने साफ कहा कि जब तक न्याय नहीं मिलेगा, आंदोलन जारी रहेगा।







