छत्तीसगढ़ में सत्तारूढ़ बीजेपी सरकार एक बार फिर अपने ही जुमलों के जाल में फंस गई है। खुद को ‘धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026’ का ढिंढोरा पीटने वाली विष्णुदेव साय सरकार ने कलश यात्रा जैसे पवित्र हिंदू आयोजन को पुलिस की लाठियों से कुचल दिया। स्थानीय लोग और संगठन चिल्ला रहे हैं—प्रशासन ने भारी पुलिस बल बुलाकर यात्रा को जबरन रोका!

संविधान का अनुच्छेद 25 हर नागरिक को धर्म पालन और प्रचार की आजादी देता है, तो ये तानाशाही किस कानून के तहत?
चयनात्मक कार्रवाई का काला चेहरा उजागर
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय पर सीधे आरोप: हिंदू भावनाओं को ठिकाने लगाने की साजिश!
विपक्ष गरज रहा है—ये न सिर्फ धार्मिक स्वतंत्रता का गला घोंटना है, बल्कि एक खास समुदाय की आस्था को कुचलने का घिनौना खेल। खुद को हिंदू हितैषी बताने वाले संगठन खामोश, क्यों? क्योंकि भगवा का झंडा थामकर चुनाव जीते, अब बिफ बेचने वालों से वसूली कर हिंदू आस्था को ही खत्म करने की ठानी है क्या??
BJP की ‘आस्था’ राजनीति का पर्दाफाश
लंबे समय से ‘धर्म-आस्था’ के नाम पर वोट लूटने वाली BJP अब ज़मीनी हकीकत में बेनकाब। अगर पारंपरिक कलश यात्राएं ही सरकारी अनुमति पर निर्भर, तो ‘धर्म स्वातंत्र्य’ का ये नाटक कितना खोखला? जनता में गुस्सा भड़क रहा—आस्था अब BJP की जेब में कैद?
सबसे कड़वा सवाल: क्या छत्तीसगढ़ में हिंदू पूजा-पर्व भी अब सत्ताधारियों की मर्जी के गुलाम होंगे?







