रायपुर/राजिम।प्रदेश में तेजी से बढ़ रही अवैध पेड़ कटाई अब केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं रह गई है, बल्कि यह आम लोगों की सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा बनती जा रही है। जंगलों के लगातार खत्म होने से जंगली जानवर अपने प्राकृतिक आवास छोड़कर शहरों और ग्रामीण इलाकों की ओर आ रहे हैं, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष के मामले बढ़ते जा रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि आए दिन जंगली जानवरों के हमलों की घटनाएं सामने आ रही हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही। ऐसे मामलों में जनप्रतिनिधि केवल मामूली मुआवजा देकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते हैं, जबकि समस्या की जड़ अवैध कटाई पर कोई सख्त कदम नहीं उठाया जा रहा।
प्रदेश के कई जिले जैसे मोहला-मानपुर, बालोद, महासमुंद, धमतरी, गरियाबंद, कबीरधाम (कवर्धा) और रायपुर जिले के राजिम क्षेत्र में इन दिनों लकड़ी माफियाओं का नेटवर्क सक्रिय है। जानकारी के अनुसार, नवापारा-राजिम और आसपास के ग्रामीण इलाकों में प्रतिबंधित और कीमती पेड़ों की धड़ल्ले से कटाई की जा रही है।
रात के अंधेरे में चलता है खेल
सूत्रों के मुताबिक, लकड़ी तस्कर रात के समय बिना नंबर वाले ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और छोटे वाहनों के जरिए लकड़ियों का परिवहन करते हैं। इन वाहनों में पहचान छुपाने के लिए नंबर प्लेट तक नहीं होती, जिससे उन्हें पकड़ना मुश्किल हो जाता है।

कीमती पेड़ों पर भी नहीं रहम
बताया जा रहा है कि कौहा जैसे प्रतिबंधित और महंगे पेड़ों को भी काटकर अवैध रूप से सॉ मिलों और बाजारों तक पहुंचाया जा रहा है। यह न सिर्फ जंगलों को नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि पर्यावरण संतुलन को भी बिगाड़ रहा है।
कार्रवाई का अभाव, उठ रहे सवाल
इतने बड़े स्तर पर अवैध कटाई और तस्करी के बावजूद वन विभाग की ओर से प्रभावी कार्रवाई का अभाव कई सवाल खड़े करता है। स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा भी तेज हो गई है कि कहीं न कहीं कुछ अधिकारियों की मिलीभगत के चलते ही यह अवैध कारोबार फल-फूल रहा है।
भविष्य के लिए चेतावनी
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते इस पर सख्ती नहीं की गई, तो आने वाले समय में जंगल पूरी तरह उजड़ सकते हैं और मानव-वन्यजीव संघर्ष और भी भयावह रूप ले सकता है।







