रायगढ़ में नदी से मिले दो हाथियों के शव, छत्तीसगढ़ में 26 महीनों में 38 हाथी और 9 बाघों की मौत

Madhya Bharat Desk
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छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले से वन्यजीव संरक्षण को लेकर चिंता बढ़ाने वाली खबर सामने आई है। जिले के घरघोड़ा वन परिक्षेत्र की कुरकुट नदी में दो हाथियों के शव मिलने से वन विभाग में हड़कंप मच गया। वन विभाग के अधिकारियों ने गुरुवार को इसकी पुष्टि की।

जानकारी के मुताबिक बुधवार को एक स्थानीय वन रक्षक ने नदी में हाथियों के शव पड़े होने की सूचना विभाग को दी। सूचना मिलते ही रायगढ़ वन मंडल के अधिकारी और वन अमला मौके पर पहुंचे और नदी से दोनों हाथियों के शवों को बाहर निकाला गया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के लिए विशेष टीम गठित की गई है। इसमें स्वान दस्ते, बिजली विभाग का उड़नदस्ता और अन्य अधिकारियों की टीम को भी शामिल किया गया है, ताकि मौत के असली कारण का पता लगाया जा सके। फिलहाल हाथियों की मौत कैसे हुई, इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है। वन विभाग का कहना है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही कारण स्पष्ट हो पाएगा।

इस बीच राज्य सरकार ने विधानसभा के बजट सत्र के दौरान जानकारी दी कि पिछले 26 महीनों में छत्तीसगढ़ में 38 हाथियों और 9 बाघों की मौत हो चुकी है। इन मौतों के पीछे करंट लगना, शिकार और जंगली जानवरों के बीच आपसी संघर्ष जैसी वजहें सामने आई हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार जंगल के पारिस्थितिक तंत्र को संतुलित बनाए रखने में हाथी और बाघ दोनों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। बाघ को जंगल का शीर्ष शिकारी माना जाता है, जो हिरण, जंगली सूअर और नीलगाय जैसे शाकाहारी जानवरों की आबादी को नियंत्रित करता है। यदि बाघों की संख्या कम हो जाए तो शाकाहारी जीव तेजी से बढ़ सकते हैं, जिससे जंगल की वनस्पतियों पर दबाव बढ़ता है और पारिस्थितिक संतुलन बिगड़ सकता है।

वहीं हाथियों को जंगल का “कीस्टोन स्पीशीज” और “इकोसिस्टम इंजीनियर” कहा जाता है। वे जंगल में रास्ते बनाते हैं, पेड़ों की टहनियां तोड़ते हैं और फलों के बीजों को दूर-दूर तक फैलाते हैं, जिससे नई वनस्पतियों के उगने में मदद मिलती है। वैज्ञानिकों के मुताबिक एक हाथी रोजाना लगभग 100 से 150 किलोग्राम तक भोजन करता है और उसके जरिए कई पौधों के बीज जंगल में फैल जाते हैं।

इस तरह हाथी और बाघ दोनों ही जंगल की जैव विविधता, फूड चेन और पर्यावरणीय संतुलन को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में इनकी लगातार हो रही मौतें वन्यजीव संरक्षण के लिए गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही हैं।

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