रायपुर। रसोई गैस की कथित कमी का मुद्दा गुरुवार को छत्तीसगढ़ विधानसभा में जोरदार तरीके से गूंजा। इस विषय पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली, जो बाद में हंगामे में बदल गई। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि नेता प्रतिपक्ष समेत लगभग 30 कांग्रेस विधायकों को सदन की कार्यवाही से निलंबित करना पड़ा।
शून्यकाल के दौरान नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने राज्य में गैस सिलेंडर की उपलब्धता को लेकर सवाल उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश के कई इलाकों में गैस की कमी की शिकायतें मिल रही हैं और आम लोगों को सिलेंडर के लिए परेशानी झेलनी पड़ रही है।
डॉ. महंत ने यह भी कहा कि पहले सरकार की ओर से दावा किया गया था कि खाड़ी देशों में चल रहे तनाव का प्रदेश में गैस आपूर्ति पर कोई असर नहीं पड़ेगा, लेकिन मौजूदा हालात इसके उलट दिखाई दे रहे हैं।
इस दौरान भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने इस मुद्दे पर आपत्ति जताई। उनका कहना था कि रसोई गैस की कीमत और आपूर्ति केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आती है, इसलिए इस विषय पर विधानसभा में चर्चा करना उचित नहीं है।
चंद्राकर के इस बयान पर विपक्षी सदस्यों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। विपक्ष का तर्क था कि चाहे मामला केंद्र सरकार से जुड़ा हो, लेकिन गैस की कमी का सीधा असर प्रदेश की जनता पर पड़ रहा है, इसलिए सदन में इस पर चर्चा होना जरूरी है।
इसी बहस के बीच माहौल गरमा गया और सदन में जोरदार हंगामा शुरू हो गया। बढ़ते शोर-शराबे को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष को पहले कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित करनी पड़ी।
हालांकि, स्थिति सामान्य नहीं होने पर कड़ी कार्रवाई करते हुए नेता प्रतिपक्ष समेत करीब 30 कांग्रेस विधायकों को सदन की कार्यवाही से निलंबित कर दिया गया।







