यूक्रेन के साथ लंबे समय से युद्ध में उलझे रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अब पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को कम करने की कोशिश करते दिखाई दे रहे हैं। मंगलवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ करीब एक घंटे तक चली टेलीफोनिक बातचीत में पुतिन ने ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच जारी सैन्य टकराव को रोकने के लिए शांति का प्रस्ताव रखा।
पिछले करीब 11 दिनों से जारी इस संघर्ष ने पूरे पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा दिया है। लगातार हमलों और जवाबी कार्रवाई के कारण क्षेत्र में मानवीय संकट की आशंका भी गहराती जा रही है। ऐसे में दोनों नेताओं के बीच हुई यह बातचीत वैश्विक राजनीति में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
मध्य पूर्व संकट पर चर्चा
क्रेमलिन की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक यह बातचीत अमेरिका की पहल पर हुई। इस दौरान दोनों नेताओं ने 28 फरवरी से जारी संघर्ष को रोकने के संभावित रास्तों पर विस्तार से विचार किया।
पुतिन ने स्पष्ट कहा कि सैन्य कार्रवाई को जल्द से जल्द रोककर कूटनीतिक और राजनीतिक समाधान की दिशा में बढ़ना जरूरी है। उनका कहना था कि युद्ध किसी समस्या का स्थायी हल नहीं होता, बल्कि इससे क्षेत्रीय और वैश्विक अस्थिरता और बढ़ जाती है।
बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि आगे होने वाले नुकसान को रोकने के लिए संवाद और कूटनीति के रास्ते खुले रखना बेहद जरूरी है।
यूक्रेन युद्ध का मुद्दा भी उठा
इस बातचीत में पुतिन ने यूक्रेन युद्ध की मौजूदा स्थिति पर भी ट्रंप को जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कई रणनीतिक इलाकों में रूसी सेना को बढ़त मिल रही है और फ्रंटलाइन पर सैनिक आगे बढ़ रहे हैं।
बताया जा रहा है कि दिसंबर के बाद यह दोनों नेताओं के बीच पहली आधिकारिक बातचीत है। इसलिए इसे यूक्रेन और पश्चिम एशिया दोनों क्षेत्रों के भविष्य के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
‘पीसमेकर’ की भूमिका में रूस
क्रेमलिन का कहना है कि पुतिन इस समय मध्य पूर्व में तनाव कम करने के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहे हैं। रूस लंबे समय से ईरान का रणनीतिक सहयोगी रहा है, इसलिए यह शांति प्रस्ताव कूटनीतिक स्तर पर काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पुतिन का मानना है कि यदि अमेरिका और इजराइल सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमत होते हैं, तो बातचीत के जरिए एक सम्मानजनक समाधान निकाला जा सकता है।
वहीं ट्रंप ने भी कहा कि यूक्रेन संकट और मध्य पूर्व में स्थिरता लाने के लिए द्विपक्षीय संवाद बेहद अहम है।
वैश्विक बाजार की नजरें भी टिकीं
विशेषज्ञों का मानना है कि इस टेलीफोनिक बातचीत से रूस और अमेरिका के बीच संवाद की नई शुरुआत हो सकती है। साथ ही इससे वैश्विक तेल बाजार में बनी अनिश्चितता भी कुछ हद तक कम होने की उम्मीद है।
अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या यह कूटनीतिक पहल पश्चिम एशिया में शांति की दिशा में कोई ठोस परिणाम दे पाएगी।







