बिहार की राजनीति में होली के रंग के साथ एक और रंग घुल गया है—सियासी रंग। चर्चा जोरों पर है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा का रुख कर सकते हैं। सोशल मीडिया से शुरू हुई यह खबर अब मुख्यधारा की राजनीति और मीडिया तक पहुंच चुकी है। हालांकि आधिकारिक तौर पर अभी तक कोई पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन अटकलों ने पटना से लेकर दिल्ली तक हलचल जरूर पैदा कर दी है।
होली के दिन तेज हुई चर्चा
होली के मौके पर यह कयास तेजी से फैलने लगा कि नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद छोड़कर केंद्र की राजनीति में नई पारी शुरू कर सकते हैं। दिलचस्प बात यह रही कि यह चर्चा पहले सोशल मीडिया पर चली और बाद में राजनीतिक गलियारों में गूंजने लगी।
बताया जा रहा है कि अगर ऐसा होता है तो बिहार में भाजपा का मुख्यमंत्री बन सकता है, जबकि नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को डिप्टी सीएम की जिम्मेदारी मिल सकती है। हालांकि इन बातों पर अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
राज्यसभा टिकट में देरी से बढ़ी अटकलें
राज्यसभा चुनाव के लिए भाजपा ने अपने उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है। वहीं एनडीए के सहयोगी दल राष्ट्रीय लोक मोर्चा ने अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा को उम्मीदवार घोषित कर दिया है।
लेकिन जनता दल (United) की ओर से दो प्रत्याशियों के नामों की घोषणा में हुई देरी ने इस चर्चा को और हवा दे दी। सूत्रों के मुताबिक एक सीट पर पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर के बेटे और केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर का नाम लगभग तय माना जा रहा है। दूसरी सीट को लेकर ही अटकलें तेज हैं।
क्या निशांत कुमार की एंट्री की तैयारी?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि नीतीश कुमार अपने बेटे निशांत कुमार को सक्रिय राजनीति में लाने की रणनीति पर काम कर सकते हैं। होलिका दहन की शाम से यह चर्चा भी चल रही थी कि निशांत को पहले राज्यसभा भेजा जाएगा या उन्हें राज्य की राजनीति में बड़ी जिम्मेदारी दी जाएगी।
कुछ राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा रही कि भाजपा नेता सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है। हालांकि यह सब अभी केवल अटकलों के दायरे में है।
विधानसभा चुनाव 2025 के बाद बदले समीकरण?
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों के बाद से ही राज्य की राजनीति में बदलाव की संभावनाओं पर चर्चा जारी है। कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केंद्र में अनुभव रखने वाले नीतीश कुमार फिर से दिल्ली की संसदीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं।
गौरतलब है कि अटल बिहारी वाजपेई सरकार में नीतीश कुमार रेल मंत्री रह चुके हैं और राष्ट्रीय राजनीति का लंबा अनुभव रखते हैं।
जदयू का क्या कहना है?
जब इस संबंध में जदयू नेताओं से सवाल पूछा गया तो उन्होंने इसे “होली की अफवाह” बताते हुए मुस्कुराकर टाल दिया। पार्टी के अंदर से भी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
फिलहाल बिहार की राजनीति में स्थिति ‘देखो और इंतजार करो’ वाली बनी हुई है।
नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चा फिलहाल केवल कयासों पर आधारित है। आधिकारिक घोषणा के बिना किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। लेकिन इतना तय है कि बिहार की राजनीति में आने वाले दिनों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।







