रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र का पहला दिन सिर्फ औपचारिक कार्यवाही तक सीमित नहीं रहा। सदन के बाहर और भीतर एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने सियासी हलकों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया।
वरिष्ठ आदिवासी नेता और कांग्रेस के कद्दावर चेहरा कवासी लखमा जैसे ही सदन परिसर पहुंचे, उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं से गर्मजोशी से मुलाकात की। गले मिलना, मुस्कुराना और हल्की-फुल्की बातचीत—इन पलों ने कैमरों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
राजनीति में संकेतों की अपनी भाषा होती है। ऐसे में सवाल उठना लाज़िमी है—क्या यह सिर्फ शिष्टाचार था या आने वाले समय की कोई बड़ी राजनीतिक पटकथा लिखी जा रही है?
छत्तीसगढ़ की राजनीति में पिछले कुछ महीनों से हलचल तेज है। सत्ता परिवर्तन के बाद विपक्ष की भूमिका में कांग्रेस के कई नेताओं की सक्रियता और रणनीति पर भी सवाल उठते रहे हैं। ऐसे समय में लखमा की भाजपा नेताओं से इस तरह की आत्मीय मुलाकात ने अटकलों को और हवा दे दी है।

हालांकि, आधिकारिक तौर पर न तो लखमा ने किसी तरह की पार्टी बदलने की मंशा जाहिर की है और न ही भाजपा की ओर से कोई बयान आया है। लेकिन राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जरूर है कि क्या प्रदेश की सियासत में कोई नया समीकरण बनने की तैयारी है?

कांग्रेस के भीतर भी इस घटनाक्रम को लेकर फुसफुसाहट शुरू हो चुकी है। वहीं भाजपा खेमे में इसे “सामान्य शिष्टाचार” बताया जा रहा है। लेकिन राजनीति में अक्सर बड़े बदलाव छोटी मुलाकातों से ही शुरू होते हैं।
अब सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ सदन की शालीनता थी या आने वाले दिनों में छत्तीसगढ़ की राजनीति में कोई नया मोड़ देखने को मिलेगा?







