महासमुंद पहुंची ‘छत्तीसगढ़ी महतारी अस्मिता रथ यात्रा’, गांव-गांव गूंजे अस्मिता और स्वाभिमान के नारे

Madhya Bharat Desk
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रायपुर/महासमुंद। सर्व छत्तीसगढ़िया किसान समाज के बैनर तले निकाली जा रही ‘छत्तीसगढ़ी महतारी अस्मिता रथ यात्रा’ ने शुक्रवार को महासमुंद जिले के कई गांवों में पहुंचकर लोगों को भावनात्मक रूप से जोड़ दिया।

रथ यात्रा ग्राम परसवानी, घोड़ारी, मुढ़ेना, बेलसोंडा, साराडीह, नांदगांव, बम्हनी, चिंगरौद और परसट्टी सहित कई गांवों में भ्रमण करती हुई आगे बढ़ी। जैसे ही ‘छत्तीसगढ़ी महतारी’ का रथ किसी गांव की सीमा में प्रवेश करता, वैसे ही वातावरण जयघोष से गूंज उठता।

बच्चे, बुजुर्ग, किसान, युवा और महिलाएं हाथों में आरती की थाली और फूल-मालाएं लेकर स्वागत के लिए उमड़ पड़ते। महिलाओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ महतारी की आरती उतारी और रथ का स्वागत किया।

गांव-गांव में आयोजित नुक्कड़ सभाओं को राज्य निर्माण संग्राम सेनानी और किसान नेता लालाराम वर्मा, छन्नू साहू, अशोक कश्यप, नंद कुमार साहू, रूपसिंह निषाद, बृजबिहारी साहू, लक्ष्मी निषाद, श्रीमती राधा बाई सिन्हा और श्यामा बाई सहित अन्य वक्ताओं ने संबोधित किया।

सभा को संबोधित करते हुए रथ यात्रा के प्रभारी लालाराम वर्मा ने कहा कि इस यात्रा का उद्देश्य छत्तीसगढ़ी अस्मिता, भाषा, संस्कृति और गौरव पुरुषों के सम्मान की रक्षा करना है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में छत्तीसगढ़ी महापुरुषों की प्रतिमाओं को नुकसान पहुंचाने और स्थानीय संस्कृति की उपेक्षा के प्रयास हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि यह यात्रा समाज को संगठित करने और छत्तीसगढ़ की अस्मिता के सवाल पर एकजुट संघर्ष का आह्वान है। उनका दावा है कि आगे चलकर यह अभियान शोषण मुक्त छत्तीसगढ़ की स्थापना के लिए जनआंदोलन का रूप लेगा।

रथ यात्रा के संयोजक जागेश्वर प्रसाद ने बताया कि अभियान का मकसद छत्तीसगढ़ी समाज को एक सूत्र में बांधना और अपनी पहचान के लिए संगठित करना है।

महासमुंद शहर में रथ यात्रा के पहुंचने पर स्थानीय लोगों ने गर्मजोशी से स्वागत किया और बड़ी संख्या में लोग इसमें शामिल हुए।

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