छत्तीसगढ़ की अस्मिता और सांस्कृतिक स्वाभिमान को लेकर शुरू की गई ‘छत्तीसगढ़ी महतारी अस्मिता रथ यात्रा’ इन दिनों ग्रामीण अंचलों में जनजागरण का केंद्र बनती जा रही है। सर्व छत्तीसगढ़िया किसान समाज के बैनर तले निकली यह यात्रा आकोली, नेवनारा, हसदा, सांकरा, बेरला, सौद, सिंवार और करामाल सहित कई गांवों में पहुंची, जहां लोगों ने बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाई।
विशेष रूप से सांकरा और बेरला के विभिन्न वार्डों में आयोजित सभाओं में ग्रामीणों, महिलाओं और युवाओं की बड़ी संख्या में मौजूदगी देखने को मिली। यात्रा के दौरान जगह-जगह छत्तीसगढ़ी महतारी की आरती उतारी गई और सैकड़ों लोगों ने संगठन की सदस्यता ग्रहण की।
गिरफ्तारी पर उठे सवाल
सभा को संबोधित करते हुए राज्य निर्माण संग्राम सेनानी अशोक कश्यप ने कहा कि जिस जोश और एकजुटता के साथ छत्तीसगढ़ के किसानों और युवाओं ने राज्य निर्माण आंदोलन में भूमिका निभाई थी, आज उसी भावना से छत्तीसगढ़ी भाषा, संस्कृति और इतिहास के सम्मान के लिए खड़ा होने का समय आ गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में छत्तीसगढ़ी अस्मिता की लगातार उपेक्षा हो रही है।
वहीं, लालाराम वर्मा ने तुमगांव (महासमुंद) की घटना का उल्लेख करते हुए सवाल उठाया कि “छत्तीसगढ़ी महतारी को आखिर किसके आदेश पर गिरफ्तार किया गया? क्या यह कार्रवाई विष्णु देव सरकार के निर्देश पर हुई? पुलिस प्रशासन और जिलाधीश को इसका जवाब देना होगा।”
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़िया समाज इस अपमान से आक्रोशित है और जब तक जवाब नहीं मिलता, आंदोलन जारी रहेगा।
एकजुट संघर्ष का संकल्प
सिंवार गांव में यात्रा के पहुंचते ही माहौल जनसभा में तब्दील हो गया। बच्चों, महिलाओं और किसानों की भीड़ उमड़ पड़ी। सभा के बाद ग्रामीणों और युवाओं ने सामूहिक संकल्प लिया कि छत्तीसगढ़ी महतारी की अस्मिता और प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान की रक्षा के लिए वे संगठित होकर संघर्ष करेंगे।
आगामी चरण में यह रथ यात्रा बेरला, शिवार, कोदवा, देवकर और धमधा क्षेत्र में सभाएं करेगी, जहां राज्य आंदोलनकारी एवं प्रदेश अध्यक्ष अनिल दुबे लोगों को संबोधित करेंगे।
यात्रा के संयोजक जागेश्वर प्रसाद ने कहा कि यह आंदोलन किसी दल विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की अस्मिता और सम्मान की रक्षा के लिए है।



