‘स्कूलों के लिए फुटबॉल’ से बदलेगी भारतीय खेल संस्कृति की तस्वीर: क्लॉडियस

Madhya Bharat Desk
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वरिष्ठ स्वतंत्र खेल पत्रकार जसवंत क्लॉडियस का मानना है कि यदि किसी खेल ने सचमुच पूरी दुनिया को एक सूत्र में बाँधा है, तो वह फुटबॉल है। जनसंख्या के आधार पर यह संसार का सर्वाधिक लोकप्रिय खेल है। संयुक्त राष्ट्र जहाँ 193 देशों को मान्यता देता है, वहीं कई अध्ययनों के अनुसार विश्व में 230 से अधिक देश और इकाइयाँ सक्रिय हैं। इन सबके बीच फुटबॉल के संचालन, संरक्षण और विकास की जिम्मेदारी FIFA (अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल महासंघ) के पास है।

फीफा आज विश्व की सबसे सशक्त और समृद्ध खेल संस्था मानी जाती है। इसके अंतर्गत 211 सदस्य देश और इकाइयाँ शामिल हैं। यह संस्था केवल प्रतियोगिताएँ आयोजित नहीं करती, बल्कि सदस्य देशों में प्रशिक्षण केंद्रों को मजबूत बनाने, प्रशिक्षकों को तैयार करने और आधारभूत सुविधाएँ उपलब्ध कराने में भी सहयोग देती है। यही कारण है कि विश्व की लगभग 90 प्रतिशत आबादी फुटबॉल से परिचित है।

 विश्व प्रतियोगिताएँ और विकास की दिशा

फीफा पुरुष एवं महिला विश्व कप, क्लब विश्व कप, 17 वर्ष और 20 वर्ष से कम आयु वर्ग के विश्व कप, फुत्सल विश्व कप तथा बीच सॉकर विश्व कप जैसे कई अंतरराष्ट्रीय आयोजनों का संचालन करता है।

FIFA World Cup Qatar 2022 के दौरान 2019 से 2022 की अवधि में फीफा ने लगभग 637.5 अरब रुपये का राजस्व अर्जित किया। जसवंत क्लॉडियस के अनुसार, यह उल्लेखनीय है कि इस धनराशि का बड़ा भाग विभिन्न देशों में फुटबॉल विकास योजनाओं पर व्यय किया जाता है।

 भारत में नई शुरुआत

भारत में फुटबॉल की व्यापक संभावनाओं को देखते हुए फीफा ने ‘स्कूलों के लिए फुटबॉल’ कार्यक्रम प्रारंभ किया है। यह पहल भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय, All India Football Federation (अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ) और Sports Authority of India (भारतीय खेल प्राधिकरण) के सहयोग से लागू की जा रही है। इस अभियान में UNESCO भी सहभागी है।

इस योजना का उद्देश्य 4 से 14 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को निःशुल्क फुटबॉल उपलब्ध कराना है, ताकि उनमें प्रारंभ से ही खेल के प्रति रुचि विकसित हो सके। नवोदय विद्यालय, केंद्रीय विद्यालय और अन्य शैक्षणिक संस्थानों के माध्यम से देश के 789 जिलों में 10 लाख फुटबॉल वितरित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। फरवरी 2026 तक 244 जिलों में 2.53 लाख फुटबॉल बाँटी जा चुकी हैं।

 भारत की वर्तमान स्थिति

वर्तमान में पुरुष वर्ग में भारत की विश्व रैंकिंग 141वीं है, जबकि महिला वर्ग में भारतीय टीम 67वें स्थान पर है। वर्ष 1956 के मेलबर्न ओलंपिक में भारतीय पुरुष टीम चौथे स्थान पर रही थी, जो आज भी प्रेरणा का स्रोत है।

फुटबॉल की विशेषता यह है कि इसे कम साधनों में, खुले मैदान में और किसी भी मौसम में खेला जा सकता है। यही कारण है कि यह आमजन का खेल बन सकता है।

 जिम्मेदारी और अवसर

जसवंत क्लॉडियस अपने विश्लेषण में यह भी कहते हैं कि यह योजना केवल विद्यालयों तक सीमित न रहे। झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले, अनाथ या विद्यालय से वंचित प्रतिभाशाली बच्चों को भी इससे जोड़ा जाना चाहिए। साथ ही यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि निःशुल्क वितरित की जा रही फुटबॉल सही हाथों तक पहुँचे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा खेलों को बढ़ावा देने के प्रयासों के बीच यह पहल भारतीय फुटबॉल के भविष्य को नई दिशा दे सकती है। अब आवश्यकता है सामूहिक जागरूकता और सक्रिय भागीदारी की।

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