बंद होने की चर्चाओं, आर्थिक संकट और लगातार गिरती साख के बीच आखिरकार सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। संकटों से जूझ रहे कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय को नया कुलपति मिल गया है।
राज्यपाल एवं कुलाधिपति द्वारा जारी आदेश के अनुसार, प्रोफेसर मनोज दयाल, विभाग–जनसंचार, गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (हिसार, हरियाणा) को कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से विश्वविद्यालय का कुलपति नियुक्त किया गया है।
लेकिन सवाल सिर्फ नियुक्ति का नहीं है — सवाल विश्वविद्यालय के अस्तित्व का है।
पिछले कुछ वर्षों से यह संस्थान घटती छात्र संख्या, आर्थिक असंतुलन, प्रशासनिक अस्थिरता और शैक्षणिक ढांचे की कमजोरी से जूझता रहा है। अंदरखाने यह चर्चा भी तेज थी कि यदि हालात नहीं सुधरे तो विश्वविद्यालय के भविष्य पर गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। ऐसे माहौल में नए कुलपति की एंट्री को सरकार का निर्णायक दांव माना जा रहा है।
अब असली चुनौती शुरू होती है। क्या प्रो. मनोज दयाल वित्तीय पारदर्शिता ला पाएंगे? क्या रुकी हुई नियुक्तियों और विकास कार्यों को गति मिलेगी? क्या पत्रकारिता की शिक्षा को डिजिटल दौर और मीडिया इंडस्ट्री की जरूरतों से जोड़ा जा सकेगा? और सबसे बड़ा सवाल — क्या बंद होने की कगार पर खड़े इस विश्वविद्यालय को वे फिर से मजबूती से खड़ा कर पाएंगे?
यह संस्थान केवल एक विश्वविद्यालय नहीं, बल्कि राज्य की पत्रकारिता शिक्षा की पहचान है। यदि यहां की व्यवस्था डगमगाती है तो उसका असर प्रदेश की पूरी अकादमिक साख पर पड़ता है।
अब निगाहें नए नेतृत्व पर टिकी हैं। यह नियुक्ति विश्वविद्यालय के लिए संजीवनी साबित होगी या महज औपचारिक बदलाव — आने वाला समय ही तय करेगा। फिलहाल रायपुर के शैक्षणिक और राजनीतिक गलियारों में एक ही सवाल गूंज रहा है — क्या नया कुलपति डूबती नैया को किनारे लगाएगा?







