नई दिल्ली।कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर एक बार फिर पार्टी के भीतर चर्चा का केंद्र बन गए हैं। जिस वक्त कांग्रेस आगामी चुनावों की रणनीति को अंतिम रूप देने में जुटी हुई है, उसी दौरान थरूर की गतिविधियों ने सियासी हलकों में हलचल तेज कर दी है।
अहम बैठक में नहीं पहुंचे थरूर
सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस नेतृत्व ने संगठन को मजबूत करने और चुनावी दिशा तय करने के लिए एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई थी। इस बैठक में पार्टी के तमाम वरिष्ठ और प्रभावशाली नेताओं की मौजूदगी को बेहद जरूरी माना जा रहा था। लेकिन शशि थरूर इस बैठक में शामिल नहीं हुए, जिससे पार्टी के भीतर सवाल खड़े हो गए।
पीएम मोदी के साथ मंच साझा
इधर, कांग्रेस की बैठक से दूरी बनाने वाले थरूर उसी समय एक सरकारी कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मंच पर नजर आए। पीएम मोदी के साथ उनकी सहज बातचीत और सार्वजनिक उपस्थिति ने राजनीतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक नई बहस को जन्म दे दिया है।
कांग्रेस से बढ़ रही दूरी?
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, थरूर का यह रुख कई संकेत देता है—
स्वतंत्र सोच की राजनीति: शशि थरूर पहले भी कई मौकों पर पार्टी लाइन से अलग राय रखते नजर आए हैं।
कार्यकर्ताओं में असमंजस: जब कांग्रेस विपक्षी एकता और अनुशासन पर जोर दे रही है, तब इस तरह की गतिविधियां जमीनी कार्यकर्ताओं को भ्रमित कर सकती हैं।
नई राजनीतिक पहचान: कुछ जानकारों का मानना है कि थरूर खुद को पारंपरिक पार्टी राजनीति से ऊपर उठाकर एक राष्ट्रीय स्तर के ‘स्टेट्समैन’ के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं।
पार्टी के भीतर नाराजगी
कांग्रेस के अंदर इस पूरे घटनाक्रम को लेकर असंतोष साफ झलक रहा है। एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि जब पार्टी चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रही है, ऐसे समय में वरिष्ठ नेताओं का अलग रुख संगठन के लिए नुकसानदेह हो सकता है।
आगे क्या होगा?
फिलहाल शशि थरूर की ओर से इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं कांग्रेस नेतृत्व ने भी चुप्पी साध रखी है। लेकिन माना जा रहा है कि हाईकमान इस मामले को गंभीरता से ले सकता है और आने वाले दिनों में पार्टी के भीतर सख्त कदम भी उठाए जा सकते हैं।







