भागीरथपुरा में मौतों को प्रशासन ने नकारा, परिजनों ने शव सड़क पर रखकर किया विरोध

Madhya Bharat Desk
2 Min Read

इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में संदिग्ध मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। बस्ती में अब तक 27 लोगों की जान जा चुकी है, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन इन मौतों को डायरिया से जोड़ने से इनकार कर रहा है। शनिवार को एक और बुजुर्ग की मौत के बाद हालात तनावपूर्ण हो गए, जब गुस्साए परिजनों ने शव को सड़क पर रखकर विरोध प्रदर्शन किया।

मृतक बद्रीलाल (63) को शुक्रवार को उल्टी-दस्त की शिकायत के बाद पहले एमवाय अस्पताल और फिर अरविंदो अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालत बिगड़ने पर उनकी मौत हो गई। हालांकि प्रशासन ने बद्रीलाल की मौत की वजह किसी अन्य गंभीर बीमारी को बताया, जिससे परिजन भड़क उठे।

शनिवार सुबह जब बद्रीलाल की शवयात्रा घर से मालवा मिल मुक्तिधाम के लिए निकली, तो पुलिया के पास परिजनों और स्थानीय लोगों ने शव को सड़क पर रख दिया और खुद भी धरने पर बैठ गए। इस दौरान जमकर नारेबाजी हुई और प्रशासन के खिलाफ आक्रोश जताया गया।

बस्तीवासियों का कहना है कि इलाके में लंबे समय से दूषित पानी की सप्लाई हो रही है, जिसकी वजह से लगातार लोग बीमार पड़ रहे हैं और जान गंवा रहे हैं। लोगों ने सवाल उठाया कि जब मरीजों में उल्टी-दस्त के लक्षण थे, तो फिर मौतों को डायरिया से अलग कैसे माना जा सकता है।

प्रदर्शन की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और परिजनों को समझाइश दी। काफी देर बाद प्रदर्शन समाप्त हुआ। प्रशासन का कहना है कि फिलहाल डायरिया के नए मरीज सामने नहीं आ रहे हैं, लेकिन अभी भी बस्ती के दस मरीज आईसीयू में भर्ती हैं, जिनमें से तीन की हालत गंभीर बताई जा रही है।

Share on WhatsApp

Share This Article
Leave a Comment