रायपुर। भारत माला परियोजना से जुड़े मुआवजा घोटाले में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पहली पूरक चार्जशीट विशेष न्यायालय में पेश कर दी है। जांच एजेंसी के मुताबिक इस घोटाले के कारण शासन को लगभग ₹40 करोड़ की आर्थिक क्षति हुई है।
EOW द्वारा प्रस्तुत पूरक चालान में दिनेश पटेल, लेखराम देवांगन और बसंती घृतलहरे को आरोपी बनाया गया है। यह चार्जशीट ब्यूरो में पंजीबद्ध अपराध क्रमांक 30/2025 के तहत दाखिल की गई है, जिसमें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत मामला दर्ज है।
जानकारी के अनुसार, तीनों आरोपियों को 29 अक्टूबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था। इनके खिलाफ 24 जनवरी 2026 को माननीय विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम), रायपुर में प्रथम पूरक चालान प्रस्तुत किया गया। प्रारंभिक जांच में इनसे जुड़े मामलों में शासन को ₹39,65,89,257 रुपये की आर्थिक हानि प्रथम दृष्टया सामने आई है।
EOW की विवेचना में सामने आया है कि भारत माला परियोजना के तहत प्रस्तावित रायपुर–विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर के भू-अर्जन मामलों में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं की गईं। आरोप है कि लोकसेवकों, मुआवजा प्राप्त करने वाले व्यक्तियों और अन्य निजी लोगों ने आपराधिक षड्यंत्र के तहत पहले से अर्जित शासकीय भूमि को दोबारा शासन को बेचकर मुआवजा लिया।
इसके अलावा निजी भूमि के गलत मुआवजा निर्धारण, बैकडेट में बटवारा व नामांतरण, वास्तविक भूमि स्वामी के बजाय अन्य व्यक्तियों को भुगतान तथा निजी भूमि को टुकड़ों में विभाजित कर शासन को आर्थिक नुकसान पहुंचाने के आरोप भी जांच में सामने आए हैं।
जांच में यह भी उजागर हुआ कि आरोपी दिनेश पटेल (तत्कालीन पटवारी, हल्का नं. 49, ग्राम नायकबांधा), लेखराम देवांगन (तत्कालीन पटवारी, ग्राम टोकरो, हल्का नं. 24) और बसंती घृतलहरे (तत्कालीन पटवारी, ग्राम भेलवाडीह) ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए भूमाफियाओं और निजी व्यक्तियों से मिलीभगत की। आरोपियों द्वारा बैकडेट में खाता विभाजन और नामांतरण के कूटरचित दस्तावेज तैयार किए गए।
EOW ने स्पष्ट किया है कि इस प्रकरण में अन्य आरोपियों के खिलाफ जांच अभी जारी है, और आने वाले दिनों में और खुलासे हो सकते हैं।



