नई दिल्ली।कांग्रेस ने केंद्र की मोदी सरकार पर मनरेगा (MGNREGA) को कमजोर करने का गंभीर आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि ग्रामीण भारत के करोड़ों मजदूरों के लिए रोजगार की सबसे बड़ी गारंटी रही मनरेगा को सरकार ने नए कानून के जरिए समाप्त करने जैसा कदम उठाया है, जो सीधे तौर पर गरीबों के अधिकारों पर हमला है।
कांग्रेस के नवगठित प्रकोष्ठ ‘रचनात्मक कांग्रेस’ के प्रमुख संदीप दीक्षित ने बुधवार को प्रेस वार्ता में कहा कि मनरेगा ने खासकर कोविड महामारी के दौरान देश के करोड़ों परिवारों को भुखमरी से बचाया था। यह योजना सिर्फ रोजगार नहीं, बल्कि सम्मानजनक जीवन की गारंटी बन चुकी थी।
दीक्षित ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने मनरेगा को हटाकर उसे ‘विकसित भारत जी राम जी अधिनियम’ से बदल दिया है, जिसका कांग्रेस लगातार विरोध कर रही है। उन्होंने बताया कि देश के कई राज्यों और जिलों में कांग्रेस द्वारा ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ अभियान चलाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने किसान और मजदूर संगठनों के साथ विस्तृत चर्चा की है, जो वर्षों से श्रमिक अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इन्हीं संगठनों की भागीदारी से अब मनरेगा पर एक राष्ट्रीय संवाद आयोजित किया जा रहा है।
मनरेगा पर राष्ट्रीय संवाद
गुरुवार को देशभर से मजदूर दिल्ली पहुंचकर मनरेगा पर संवाद करेंगे। ये वही श्रमिक हैं, जिन्होंने अपने गांवों में सड़कें, स्कूल, पंचायत भवन, तालाब और जल संरक्षण से जुड़े कई अहम कार्य किए हैं। कांग्रेस का दावा है कि इन मजदूरों ने मनरेगा के जरिए गांवों के विकास में निर्णायक भूमिका निभाई।
पंचायत व्यवस्था को कमजोर करने का आरोप
संदीप दीक्षित ने कहा कि पंचायतों ने अपने क्षेत्र के विकास के लिए स्वयं निर्णय लिए और योजनाओं को ज़मीन पर उतारा, लेकिन मौजूदा सरकार इस पूरी विकेंद्रीकृत व्यवस्था को खत्म करने पर तुली हुई है।
गुरुवार सुबह दिल्ली के जवाहर भवन में आयोजित कार्यक्रम में देश के कोने-कोने से आए मनरेगा मजदूर अपने अनुभव और आगे की रणनीति साझा करेंगे। इस दौरान वे अपने कार्यस्थल से लाई गई एक मुट्ठी मिट्टी सौंपेंगे, जिसे सामूहिक संघर्ष और अधिकारों की प्रतीक के रूप में एकत्र किया जाएगा।
कांग्रेस का कहना है कि यह प्रतीकात्मक विरोध केंद्र सरकार को यह याद दिलाने के लिए है कि देश का असली निर्माण श्रमिकों के हाथों से होता है, न कि कागज़ी योजनाओं से।







