कंधे पर धान की बोरी लेकर कलेक्टोरेट पहुंचे कांग्रेसी, बोले– पूरा धान नहीं खरीदा तो मंत्रियों के घर लगाएंगे मंडी

Madhya Bharat Desk
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बिलासपुर।छत्तीसगढ़ में धान खरीदी को लेकर किसानों की परेशानी अब सड़कों पर दिखाई देने लगी है। जिला कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष और बेलतरा विधानसभा से कांग्रेस विधायक प्रत्याशी विजय केशरवानी किसानों के साथ कंधे पर धान की बोरी उठाकर कलेक्टोरेट पहुंचे और प्रशासन को ज्ञापन सौंपा।

कांग्रेस नेताओं और किसानों ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि तय समय सीमा में किसानों का पूरा धान नहीं खरीदा गया, तो वे सत्ताधारी दल के विधायकों, मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों के घरों में धान की बोरियां रखेंगे। इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।

राज्य सरकार ने समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के लिए समितियों को प्रतिदिन खरीदी की एक निश्चित सीमा तय कर दी है। इसी लिमिट के कारण किसानों से प्रति एकड़ निर्धारित 21 क्विंटल धान की खरीदी पूरी नहीं हो पा रही है। धान खरीदी की अंतिम तिथि 31 जनवरी तय है, लेकिन खरीदी की धीमी रफ्तार ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है।

खरीदी की रफ्तार बेहद धीमी

विजय केशरवानी ने कलेक्टर की अनुपस्थिति में एडीएम दूबे को सौंपे ज्ञापन में बताया कि बेलतरा विधानसभा क्षेत्र की करीब 27 समितियों में धान खरीदी बेहद धीमी गति से हो रही है। टोकन मिलने के बावजूद किसान तय तारीख पर अपना धान नहीं बेच पा रहे हैं।

किसानों का कहना है कि प्रतिदिन की लिमिट पूरी होते ही समितियों में खरीदी बंद हो जाती है। कंप्यूटर सिस्टम लिमिट से अधिक धान का डेटा अपलोड नहीं करता, जिससे किसान खाली हाथ लौटने को मजबूर हैं।

छोटे-बड़े सभी किसान परेशान

यह समस्या सिर्फ छोटे किसानों तक सीमित नहीं है, बल्कि बड़े किसान भी इससे जूझ रहे हैं। किसान रोज़मर्रा का काम छोड़कर समितियों के चक्कर काट रहे हैं, वहीं समितियों के कर्मचारी भी लिमिट की बाध्यता के चलते असहाय नजर आ रहे हैं।

कहां कितना धान खरीदा गया

  • खरीदी के आंकड़े पेश करते हुए बताया गया कि
  • बेलतरा में 50 हजार क्विंटल लक्ष्य के मुकाबले 28 हजार
  • सलका में 40 हजार के मुकाबले 24 हजार
  • कर्रा में 56 हजार के मुकाबले 25 हजार
  • सेलर में 44 हजार के मुकाबले 24 हजार
  • उरतुम में 36 हजार के मुकाबले 21 हजार
  • अकलतरी और बामू में 46 हजार के मुकाबले महज 1200 क्विंटल
  • कर्मा में 60 हजार के मुकाबले 32 हजार
  • लखराम में 70 हजार के मुकाबले 40 हजार
  • पौंसरा में 40 हजार के मुकाबले 26 हजार क्विंटल धान की खरीदी हुई है।

सरकार पर गंभीर आरोप

विजय केशरवानी ने आरोप लगाया कि यदि सरकार वास्तव में किसानों से पूरा धान खरीदना चाहती, तो खरीदी की रफ्तार इतनी धीमी नहीं होती। टोकन जारी कर किसानों को समितियों के चक्कर कटवाना किसानों के साथ खुला अन्याय है। टोकन मिलने के बावजूद यदि किसान उस दिन धान नहीं बेच पाए, तो उनकी जिम्मेदारी कौन लेगा?

इस दौरान ज्ञापन सौंपने वालों में राजेंद्र डब्बू साहू, झगरराम सूर्यवंशी, धनंजय सिंह ठाकुर, अनिल यादव, शीतल दास मानिकपुरी, रामकुमार भोई, शिल्पी तिवारी, विनोद साहू, उत्तरा सक्सेना, रामफल कौशिक, संतोष राज और किशन पटेल समेत बड़ी संख्या में किसान शामिल रहे।

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