नई दिल्ली: जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत की गई हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 12 जनवरी को सुनवाई करेगा। यह याचिका उनकी पत्नी गीतांजलि वांगचुक द्वारा दाखिल की गई है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत के सामने हिरासत प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए। सिब्बल ने कहा कि वांगचुक को गिरफ्तार किए जाने के 28 दिन बाद तक हिरासत के आधार नहीं सौंपे गए, जबकि कानून स्पष्ट रूप से कहता है कि हिरासत के कारण 5 दिनों के भीतर और अधिकतम 10 दिनों में उपलब्ध कराना अनिवार्य है।
कपिल सिब्बल ने यह भी आरोप लगाया कि बाद में सोनम वांगचुक को एक पेन ड्राइव सौंपी गई, लेकिन उसमें वे चार अहम वीडियो शामिल नहीं थे, जिनके आधार पर हिरासत का आदेश पारित किया गया था। उन्होंने दावा किया कि संबंधित एजेंसियां जानबूझकर तथ्यों और सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर रही हैं।
सोनम वांगचुक का पक्ष रखते हुए सिब्बल ने अदालत को बताया कि 24 सितंबर 2025 को दिए गए उनके भाषण में कहीं भी हिंसा का समर्थन नहीं किया गया, बल्कि उन्होंने सार्वजनिक रूप से हिंसा की निंदा की थी और उसे समाप्त करने की अपील की थी। हिंसक घटनाओं से आहत होकर सोनम वांगचुक ने अपना अनशन भी समाप्त कर दिया था।
अब इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई 12 जनवरी को होगी, जिस पर सभी की निगाहें टिकी हैं।







