भारत से हार के बाद भी नहीं सुधरा पाकिस्तान, फाइटर जेट बेचकर IMF से छुटकारे का दावा

Madhya Bharat Desk
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भारत से सैन्य और कूटनीतिक मोर्चे पर बार-बार मात खाने के बावजूद पाकिस्तान के हुक्मरान अपनी हकीकत से मुंह मोड़ने को तैयार नहीं हैं। गंभीर आर्थिक संकट, बढ़ती महंगाई, आतंकवाद और जनता के टूटते भरोसे के बीच अब पाकिस्तान ने एक बार फिर ‘हसीन सपनों’ का सहारा लिया है।

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की सख्त शर्तों के चलते पाकिस्तान को अपनी राष्ट्रीय एयरलाइन पीआईए तक बेचनी पड़ी। इसके बावजूद पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने दावा किया है कि आने वाले छह महीनों में देश को IMF से कर्ज लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। उनके इस दावे की वजह है—पाकिस्तान के फाइटर जेट्स की कथित बढ़ती वैश्विक मांग।

 JF-17 की डिमांड बढ़ने का दावा

कराची स्थित जियो टीवी से बातचीत में ख्वाजा आसिफ ने कहा कि मई 2025 में भारत-पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य टकराव के बाद पाकिस्तान के रक्षा उत्पादों, खासकर JF-17 फाइटर जेट को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दिलचस्पी बढ़ी है। उन्होंने दावा किया कि इन रक्षा ऑर्डरों से पाकिस्तान की आर्थिक हालत इतनी सुधर जाएगी कि IMF के कर्ज की जरूरत ही नहीं पड़ेगी।

आसिफ के मुताबिक, “हमारे लड़ाकू विमानों की क्षमताओं को दुनिया ने देखा है और अब हमें लगातार ऑर्डर मिल रहे हैं।”

 विशेषज्ञों ने बताया दावा बेबुनियाद

हालांकि रक्षा विशेषज्ञों और अर्थशास्त्रियों ने इस बयान को पूरी तरह अवास्तविक करार दिया है। विश्लेषकों का कहना है कि JF-17 का निर्माण पाकिस्तान अकेले नहीं करता, बल्कि इसका बड़ा हिस्सा चीन के साथ साझा उत्पादन पर आधारित है। ऐसे में विमान बिक्री से मिलने वाला मुनाफा भी चीन के साथ बंटता है।

विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि फाइटर जेट्स की सीमित बिक्री से पाकिस्तान के करीब 300 अरब डॉलर के कर्ज की भरपाई संभव नहीं है। IMF से दूरी बनाने का दावा केवल राजनीतिक बयानबाजी भर है।

 ऑपरेशन सिंदूर में JF-17 की खुली पोल

JF-17 एक चौथी पीढ़ी का हल्का मल्टीरोल फाइटर जेट है, जिसे पाकिस्तान और चीन ने मिलकर विकसित किया है। मई 2025 में हुए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने दावा किया था कि उसने इसी जेट के जरिए भारत के 6 लड़ाकू विमानों को मार गिराया।

हालांकि भारत ने पाकिस्तान के इन दावों को ठोस सबूतों के साथ खारिज कर दिया था। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पाकिस्तान के इस दुष्प्रचार को कोई समर्थन नहीं मिला। इसके बावजूद पाकिस्तानी नेतृत्व अपनी पुरानी आदत के मुताबिक हार को जीत में बदलकर पेश करता रहा।

IMF से छुटकारे और फाइटर जेट बिक्री के दावे फिलहाल जमीनी हकीकत से कोसों दूर नजर आते हैं। आर्थिक बदहाली से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए यह बयान सच्चाई से ज्यादा राजनीतिक भ्रम पैदा करने की कोशिश मानी जा रही है।

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