रायपुर।छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) भर्ती घोटाले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बड़ा खुलासा करते हुए विशेष अदालत में करीब 400 पन्नों की चार्जशीट दाखिल कर दी है। चार्जशीट के मुताबिक, प्रश्नपत्र लीक कराने के बाद चुनिंदा अभ्यर्थियों को अफसर बनाने की साजिश के तहत बारनवापारा को जानबूझकर विशेष परीक्षा केंद्र बनाया गया था।
CBI की जांच में सामने आया है कि इस पूरे नेटवर्क में कारोबारी उत्कर्ष चंद्राकर की अहम भूमिका रही। आरोप है कि परीक्षा केंद्र पर अभ्यर्थियों के ठहरने से लेकर अन्य सुविधाओं की जिम्मेदारी उसी ने संभाली थी।
चार्जशीट में तत्कालीन CGPSC अध्यक्ष टामन सोनवानी, परीक्षा नियंत्रक सहित कुल 13 लोगों को आरोपी बनाया गया है। हैरानी की बात यह है कि जहां एक ओर 13 आरोपी हैं, वहीं 29 चयनित अभ्यर्थियों को गवाह के तौर पर सूचीबद्ध किया गया है। चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब इस हाई-प्रोफाइल मामले की सुनवाई में तेजी आने की उम्मीद है।
बारनवापारा क्यों बना ‘स्पेशल सेंटर’?
CBI के अनुसार, भर्ती प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए पहले से ही एक सुनियोजित साजिश रची गई थी। इसके तहत बारनवापारा को ऐसा केंद्र बनाया गया, जहां चुनिंदा अभ्यर्थियों को नियंत्रित माहौल में परीक्षा दिलाई जा सके। चार्जशीट में साफ लिखा है कि यहां की व्यवस्थाएं कारोबारी उत्कर्ष चंद्राकर के जरिए कराई गईं, जिससे पूरे मामले में संगठित भ्रष्टाचार की पुष्टि होती है।
ये हैं चार्जशीट में नामजद आरोपी
CBI द्वारा दाखिल फाइनल चार्जशीट में जिन लोगों को आरोपी बनाया गया है, उनमें—
- तत्कालीन अध्यक्ष टामन सोनवानी
- उद्योगपति श्रवण कुमार गोयल
- पूर्व सचिव जीवन किशोर ध्रुव
- उनका बेटा सुमित ध्रुव
- परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक
- टामन सोनवानी का भतीजा नितेश सोनवानी
- शशांक गोयल और उसकी पत्नी भूमिका कटियार
- साहिल सोनवानी
- एक्जाम कंट्रोलर ललित गणवीर
- मीशा कोसले, दीपा अजगले आदिल
- और कारोबारी उत्कर्ष चंद्राकर शामिल हैं।
एक साल तक छिपाया गया था प्रश्नपत्र
CBI ने खुलासा किया है कि CGPSC 2020 के लिए तैयार किया गया प्रश्नपत्र करीब एक साल तक दबाकर रखा गया। इस दौरान इसकी कोई आधिकारिक एंट्री नहीं की गई और बाद में इसी लीक हो चुके प्रश्नपत्र का इस्तेमाल CGPSC 2021 की मुख्य परीक्षा में कर लिया गया।
इस लीक का सबूत टामन सोनवानी के भतीजे विनीत खेबर और उसकी पत्नी स्वेता के बीच हुई व्हाट्सएप चैट से मिला, जिसके आधार पर जांच आगे बढ़ी।
रिश्तेदारों को पहुंचाया गया फायदा
चार्जशीट के मुताबिक, तत्कालीन सचिव जीवन किशोर ध्रुव ने अपने बेटे सुमित ध्रुव को पहले ही प्रश्नपत्र और मॉडल उत्तर उपलब्ध करा दिए थे। छापेमारी के दौरान उनके घर से प्रश्नपत्र और उत्तरों की फोटोकॉपी भी बरामद हुई।
इसी तरह टामन सोनवानी पर अपनी बहू मीशा कोसले और दीपा आदिल को लाभ पहुंचाने के आरोप हैं। वहीं नेहा और निखिल खलखो के चयन को भी CBI ने संदेह के घेरे में रखा है।
171 पदों पर हुई थी भर्ती
- CGPSC 2021 परीक्षा के जरिए 171 पदों पर भर्ती की गई थी।
- प्रारंभिक परीक्षा में 2565 अभ्यर्थी सफल
- मुख्य परीक्षा में 509 अभ्यर्थी पास
- इंटरव्यू के बाद 170 उम्मीदवारों की अंतिम सूची जारी की गई थी
अब CBI की चार्जशीट के बाद यह भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह सवालों के घेरे में आ गई है।



