रायपुर।छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने करीब दो वर्षों की जांच के बाद विशेष अदालत में अपनी अंतिम चार्जशीट पेश कर दी है। जांच के दौरान ईडी ने तीन शराब कंपनियों समेत अधिकारियों और कारोबारियों की कुल 382 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति अटैच की है।
चार्जशीट के मुताबिक भाटिया वाइन, छत्तीसगढ़ डिस्टलरी और वेलकम डिस्टलरी की लगभग 68 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्ति कुर्क की गई है। इसके साथ ही तत्कालीन आबकारी आयुक्त निरंजन दास सहित 31 आबकारी अधिकारियों की करीब 38 करोड़ रुपये की संपत्ति भी ईडी के कब्जे में ली गई है। मामले में अब तक 22 गिरफ्तार आरोपियों सहित कुल 81 लोगों को आरोपी बनाया गया है। ईडी ने घोटाले की रकम करीब 3,000 करोड़ रुपये से अधिक आंकी है।
59 नए नाम शामिल, बड़े अफसर और कारोबारी घेरे में
ईडी ने अपनी चार्जशीट में 59 नए आरोपियों के नाम जोड़े हैं। इनमें पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की उपसचिव रह चुकीं सौम्या चौरसिया, तत्कालीन आबकारी आयुक्त निरंजन दास, केके श्रीवास्तव, रिटायर आईएएस अनिल टुटेजा के बेटे यश टुटेजा, कारोबारी लक्ष्मीनारायण बंसल उर्फ पप्पू, एफएल-10 लाइसेंसधारी, डिस्टलरी संचालक और आबकारी विभाग के अधिकारी शामिल हैं।
16 दिसंबर को ईडी ने सौम्या चौरसिया को इस मामले में दोबारा गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी ने चार्जशीट में डिजिटल सबूत, बैंक ट्रांजैक्शन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, संपत्ति से जुड़े दस्तावेज और गवाहों के बयान को आधार बनाया है।
ट्रायल की तैयारी, जांच अवधि बढ़ाने की मांग
चार्जशीट दाखिल होने के साथ ही अब मामले में ट्रायल की प्रक्रिया शुरू होगी। पहले आरोप तय होंगे, फिर गवाहों और सबूतों पर सुनवाई की जाएगी। वहीं, इस घोटाले की जांच कर रही एसीबी-ईओडब्ल्यू ने सुप्रीम कोर्ट से जांच की समय-सीमा बढ़ाने की मांग की है।
इससे पहले 22 दिसंबर को ईओडब्ल्यू ने विशेष अदालत में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल के खिलाफ लगभग 3,800 पन्नों की सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की थी। एजेंसी का दावा है कि चैतन्य बघेल को शराब घोटाले से 200 से 250 करोड़ रुपये की अवैध रकम मिली और सिंडिकेट के जरिए वसूली में उनकी अहम भूमिका रही।
15 जिलों में पोस्टिंग तय, पूरा तंत्र बनाया गया
ईडी की चार्जशीट में करीब 900 गवाहों को शामिल किया गया है। एजेंसी के अनुसार होटल कारोबारी अनवर ढेबर, अरुणपति त्रिपाठी, रिटायर आईएएस अनिल टुटेजा और सौम्या चौरसिया ने मिलकर आबकारी विभाग में भ्रष्टाचार के लिए एक संगठित सिंडिकेट खड़ा किया।
इस सिंडिकेट ने राज्य के 15 जिलों को चिन्हित कर मनचाहे अधिकारियों की पोस्टिंग कराई। सबसे पहले आईएएस निरंजन दास को आबकारी आयुक्त बनाया गया, इसके बाद आबकारी नीति में बदलाव कर अवैध वसूली और कमीशन का नेटवर्क खड़ा किया गया। जांच एजेंसी का दावा है कि इस पूरे सिस्टम में पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे चैतन्य बघेल उर्फ बिट्टू की भी भूमिका रही।
विधानसभा चुनाव में करोड़ों की फंडिंग का आरोप
ईडी के अनुसार घोटाले से जुटाई गई रकम के बंटवारे की जिम्मेदारी अनवर ढेबर, लक्ष्मीनारायण बंसल, कथित तांत्रिक केके श्रीवास्तव और विकास अग्रवाल के पास थी। केके श्रीवास्तव समेत 29 आबकारी अधिकारियों ने मिलकर विधानसभा चुनाव 2023 में एक राजनीतिक दल के लिए करोड़ों रुपये की फंडिंग की। एजेंसी का कहना है कि श्रीवास्तव जेल में है, जबकि लक्ष्मीनारायण बंसल बाहर रहकर गतिविधियां संचालित कर रहा था।
जांच में सामने आया है कि शराब की बोतलों पर करीब 32 करोड़ रुपये के डुप्लीकेट होलोग्राम का इस्तेमाल किया गया। ईडी इस घोटाले को लगभग 2,800 करोड़ रुपये का मान रही है, जबकि ईओडब्ल्यू के मुताबिक यह आंकड़ा 3,200 करोड़ से अधिक है। एजेंसियों का अनुमान है कि कुल घोटाला 3,500 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।
विदेशों में निवेश, हवाला के जरिए पैसा बाहर
ईडी का दावा है कि घोटाले की बड़ी रकम हवाला के माध्यम से विदेश भेजी गई। दुबई, नीदरलैंड और लंदन में आरोपियों और उनके रिश्तेदारों के नाम पर करोड़ों रुपये का निवेश किया गया है। कानूनी जानकारों का मानना है कि चार्जशीट का विशाल आकार और आरोपियों की संख्या इस केस को लंबा और बेहद जटिल बना सकती है।







