दंतेवाड़ा-बीजापुर बॉर्डर पर अब तक 15 नक्सली मारे गए, LMG–AK47 जब्त

Madhya Bharat Desk
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दंतेवाड़ा और बीजापुर की सीमा पर हुए भीषण नक्सली हमले ने पूरे बस्तर को एक बार फिर दहला दिया है। बुधवार सुबह भैरमगढ़ थाना क्षेत्र के ग्राम केशकुतुल में डीआरजी, एसटीएफ, सीआरपीएफ और अन्य बलों की संयुक्त टीम सर्चिंग पर निकली थी, तभी घने जंगलों में अचानक नक्सलियों ने हमला कर दिया। इसके बाद शुरू हुई मुठभेड़ कई घंटों तक रुक-रुक कर चलती रही। इस दौरान सुरक्षा बलों ने 12 नक्सलियों को मार गिराया, लेकिन दुखद रूप से डीआरजी के तीन वीर जवान—प्रधान आरक्षक मोनू वड़ाड़ी, आरक्षक दुकारु गोड़े और बीजापुर के रमेश सोड़ी—ने अपने प्राणों की आहुति दे दी। दो जवान, ASI जनार्दन कोर्राम और आरक्षक सोमदेव यादव घायल हुए, जिन्हें सुरक्षित उपचार दिया जा रहा है और दोनों खतरे से बाहर बताए गए हैं।

अंधेरा बढ़ने के बाद ऑपरेशन को अस्थायी रूप से रोकना पड़ा, लेकिन गुरुवार सुबह जैसे ही तलाशी फिर शुरू हुई, सुरक्षाबलों को जंगल के भीतर से तीन और नक्सलियों के शव मिले। इस तरह कुल मारे गए नक्सलियों की संख्या बढ़कर 15 हो गई है। बरामद शवों में PLGA कंपनी क्रमांक 02 का कमांडर और 8 लाख रुपये का इनामी कुख्यात माओवादी DVCM मोडियामी वेल्ला भी शामिल है। अन्य शवों की पहचान की प्रक्रिया जारी है।

मुठभेड़ स्थल से जो हथियार बरामद किए गए हैं, वे इस ऑपरेशन की तीव्रता को साफ दर्शाते हैं—LMG मशीन गन, AK-47 राइफलें, SLR, INSAS, .303 राइफलें, बड़ी मात्रा में गोला-बारूद और अन्य माओवादी सामान सुरक्षा बलों ने जब्त किया है। इसी के साथ सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके को कॉर्डन कर लिया है और घने जंगल के अंदरूनी हिस्सों में सघन तलाशी जारी है। अतिरिक्त बल भी क्षेत्र में भेज दिया गया है ताकि किसी भी तरह की खतरे की स्थिति को समय रहते रोका जा सके।

बीजापुर एसपी डॉ. जितेंद्र यादव ने पुष्टि की है कि मुठभेड़ में अब तक 15 नक्सलियों के मारे जाने की पुष्टि हो चुकी है और जवान अभी भी जंगल के भीतर ऑपरेशन में लगे हुए हैं। उनकी सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए विस्तृत जानकारी उनके सुरक्षित लौटने के बाद ही सार्वजनिक की जाएगी। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और इलाके में लगातार निगरानी रखी जा रही है।

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