BJP में गाइडलाइन युद्ध: बृजमोहन ने फैसले को जनविरोधी कहा, नरेश गुप्ता बोले—फैसला सही

Madhya Bharat Desk
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ज़मीन गाइडलाइन दरों में बढ़ोत्तरी पर भाजपा के भीतर महाभारत, बृजमोहन विरोध में, करीबी नरेश गुप्ता समर्थन में

रायपुर। छत्तीसगढ़ में ज़मीन की नई गाइडलाइन दरों में की गई भारी वृद्धि को लेकर सत्तारूढ़ भाजपा के भीतर ही गहरा अंतर्विरोध पैदा हो गया है। जहां एक ओर रायपुर सांसद और कद्दावर नेता बृजमोहन अग्रवाल ने इस फैसले को जनविरोधी बताते हुए इस पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है, वहीं दूसरी ओर उनके ही करीबी माने जाने वाले भाजपा नेता और अधिवक्ता नरेश चन्द्र गुप्ता ने इस वृद्धि का समर्थन किया है। इस राजनीतिक खींचतान ने विपक्षी दलों को सरकार के खिलाफ एक बड़ा मुद्दा दे दिया है।

जनविरोधी फैसला, 800% वृद्धि अव्यावहारिक: बृजमोहन अग्रवाल

सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने मंगलवार को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखकर नई गाइडलाइन दरों पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। उन्होंने दरों में 100 से 800 प्रतिशत तक की वृद्धि को अव्यावहारिक करार दिया, जो बिना जन परामर्श और बिना वास्तविक मूल्यांकन के की गई है। उनका कहना है कि यह वृद्धि ‘इज ऑफ लिविंग’ और ‘इज ऑफ डूइंग बिजनेस’ दोनों के विपरीत है और किसान, छोटे व्यवसायी, मध्यम वर्ग सहित 99 प्रतिशत जनता पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डालती है। उन्होंने लाभांडी और निमोरा जैसे गांवों में क्रमशः 725 प्रतिशत और 888 प्रतिशत तक की वृद्धि का उदाहरण देते हुए इसे आर्थिक अन्याय बताया। साथ ही उन्होंने पूर्ववत गाइडलाइन दरें पुनः लागू करने, एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति से वास्तविक मूल्यांकन कराने और पंजीयन शुल्क को 4% से घटाकर 0.8% करने की मांग की।

कालाधन पर लगाम, सरकार का फैसला उचित: नरेश चन्द्र गुप्ता

इसके ठीक विपरीत, बृजमोहन अग्रवाल के करीबी भाजपा नेता नरेश चन्द्र गुप्ता ने सरकार के फैसले का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि नई दरें खरीदी-बिक्री के वास्तविक मूल्य के आसपास हैं, जो बाजार भाव को दर्शाती हैं, जैसे कि ₹1800 गाइडलाइन दर वाले प्लॉट ₹6000 में बिक रहे हैं और ₹6500 में विज्ञापित हो रहे हैं। उनका मानना है कि वास्तविक मूल्य पर दरें तय होने से कालाधन और भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी, क्योंकि सौदों में “ऊपर से कोई नगदी का लेनदेन नहीं” होगा। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि जनकल्याणकारी सरकार को चलाने के लिए समुचित और वास्तविक कर मिलना अनिवार्य है। साथ ही उन्होंने बृजमोहन अग्रवाल का नाम लिए बिना सवाल किया कि जो लोग घटी दरें चाहते हैं, क्या वे इस बात की गारंटी देंगे कि सौदे वास्तविक रूप से उसी कम मूल्य पर होंगे?

सांसद अग्रवाल का यह पत्र सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहा है, जिसने न केवल विपक्षी पार्टियों को सरकार के खिलाफ बड़ा हथियार दिया है, बल्कि ज़मीन गाइडलाइन के मुद्दे पर भाजपा के भीतर एकराय न होने की स्थिति को भी उजागर कर दिया है।

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