कांकेर में मतांतरित कर्मचारियों के खिलाफ ग्रामसभा का फैसला, आंगनबाड़ी और मितानिन हटाने की मांग

Madhya Bharat Desk
4 Min Read

कांकेर।कांकेर जिले के आदिवासी बहुल क्षेत्रों में मतांतरण को लेकर असंतोष लगातार गहराता जा रहा है। अब यह विवाद आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और मितानिनों तक पहुंच गया है। भानुप्रतापपुर विकासखंड के ग्राम परवी में आयोजित ग्रामसभा में मतांतरित आंगनबाड़ी सहायिका और मितानिन को पद से हटाने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया।

मंगलवार को सरपंच के नेतृत्व में ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए एक सप्ताह के भीतर कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि तय समयसीमा में संबंधित कर्मियों को पद से नहीं हटाया गया, तो वे बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्र भेजना बंद कर देंगे।

इससे पहले नरहरपुर विकासखंड के पुसागांव और रिसेवाड़ा पंचायत के आश्रित ग्राम भैंसमुडी में भी इसी तरह की मांग उठ चुकी है। वहीं बड़ेतेवड़ा गांव में मतांतरित व्यक्ति के शव दफनाने को लेकर पहले ही तनावपूर्ण और हिंसक स्थिति बन चुकी है।

ग्रामसभा प्रस्ताव की जानकारी कलेक्टर को दी

ग्राम परवी में आयोजित ग्रामसभा में आंगनबाड़ी सहायिका फुलबती मंडावी और मितानिन पारबती कोमरा को पद से हटाने का प्रस्ताव ग्रामसभा कार्रवाई पंजी में दर्ज किया गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि मतांतरण के बाद भी कुछ परिवार अनुसूचित जनजाति से जुड़ी आरक्षण सुविधाओं और शासकीय योजनाओं का लाभ ले रहे हैं, जिसे तत्काल प्रभाव से रोका जाना चाहिए।

सरपंच राजेंद्र ध्रुव ने बताया कि ग्रामसभा ने स्पष्ट रूप से निर्णय लिया है कि यदि प्रशासन ने एक सप्ताह के भीतर कार्रवाई नहीं की, तो ग्रामीण सामूहिक विरोध दर्ज कराएंगे।

वन अधिकार पट्टा निरस्त करने की भी मांग

ग्रामीणों ने दो दिसंबर 2025 को मतांतरित ग्रामीण राजकुमार को जारी किए गए वन अधिकार पट्टे को निरस्त करने का भी प्रस्ताव पारित किया है। ग्रामसभा का कहना है कि पट्टा जारी होने के समय संबंधित व्यक्ति ने ईसाई धर्म स्वीकार नहीं किया था, जबकि अब वह गांव की सामाजिक व्यवस्था और परंपराओं का पालन नहीं कर रहा है।

सात परिवार कर चुके हैं मतांतरण

ग्राम पंचायत परवी में लगभग सात परिवार मतांतरण कर चुके हैं। इनमें से कुछ परिवार पिछले दस वर्षों से ईसाई धर्म का पालन कर रहे हैं, जबकि कुछ ने चार से पांच वर्ष पहले मतांतरण किया है। ग्रामीणों का आरोप है कि ये परिवार गांव की परंपराओं और सामाजिक नियमों का पालन नहीं कर रहे, जिससे आदिवासी संस्कृति पर संकट उत्पन्न हो रहा है।

इसी को लेकर अंदरूनी गांवों में लगातार बैठकें हो रही हैं, जहां मतांतरित परिवारों से मूल धर्म में वापसी को लेकर चर्चा की जा रही है।

बच्चों के मतांतरण की आशंका

नरहरपुर विकासखंड के भैंसमुडी, पुसागांव और परवी गांवों में मतांतरित आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और मितानिनों को हटाने की मांग को लेकर माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है। भैंसमुडी में पिछले माह ग्रामसभा प्रस्ताव पारित किया गया था, लेकिन अब तक प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

विरोध के चलते ग्रामीणों ने कुछ समय के लिए बच्चों को आंगनबाड़ी भेजना बंद कर दिया था, हालांकि बाद में सोमवार से बच्चों को फिर से भेजना शुरू किया गया। पालकों का कहना है कि उन्हें आशंका है कि बच्चों को बहला-फुसलाकर उनका मतांतरण कराया जा सकता है।

इस पूरे मामले पर बस्तर संभाग आयुक्त डोमन सिंह ने कहा कि यह विषय जिला कलेक्टर के अधिकार क्षेत्र में आता है और कलेक्टर नियमानुसार निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र हैं।

Share on WhatsApp

Share This Article
Leave a Comment