रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अपने बहुप्रतीक्षित दो दिवसीय भारत दौरे पर आज नई दिल्ली पहुंच रहे हैं। चार साल बाद हो रही उनकी यह यात्रा न सिर्फ कूटनीतिक रूप से अहम मानी जा रही है, बल्कि दोनों देशों के बीच ऊर्जा, रक्षा और रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने वाली भी मानी जा रही है।
पुतिन 4 और 5 दिसंबर को भारत में रहेंगे और इस दौरान वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उच्चस्तरीय बैठकें, राजकीय कार्यक्रम और बिजनेस फोरम में भाग लेंगे। विशेषज्ञ इसे भारत-रूस संबंधों के “री-सेट” का बेहतर मौका मान रहे हैं।
4 दिसंबर: दिल्ली में पुतिन का पहला दिन – मोदी के साथ खास डिनर
रूस के राष्ट्रपति शाम होते-होते नई दिल्ली पहुंचेंगे, जहां उनकी पीएम मोदी से आमने-सामने मुलाकात तय है।
दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय वार्ता के बाद प्रधानमंत्री मोदी, पुतिन के सम्मान में एक विशेष निजी रात्रिभोज आयोजित करेंगे।
यह बैठक दोनों देशों के बीच ऊर्जा, सैन्य तकनीक और नए निवेश पर निर्णायक सहमति की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।
5 दिसंबर: राजकीय स्वागत, राजघाट और बड़े फैसलों का दिन
दौरे के दूसरे दिन राष्ट्रपति भवन में पुतिन का औपचारिक स्वागत किया जाएगा। इसके बाद वह राजघाट पहुंचकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देंगे।
इसके बाद हैदराबाद हाउस में प्रतिनिधिमंडल स्तर की बैठकें होंगी, जहां दोनों देशों के बड़े उद्योगपति भी मौजूद रहेंगे।
इसी दिन भारत-रूस बिजनेस फोरम में भी दोनों नेता शामिल होंगे और शाम को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू राजकीय भोज देंगी।
रक्षा और ऊर्जा क्षेत्र में बड़े समझौतों की उम्मीद
रूसी प्रतिनिधिमंडल में रक्षा मंत्री आंद्रेई बेलोउसॉव के साथ-साथ बैंकिंग, परमाणु ऊर्जा, विमानन और तेल-गैस क्षेत्र के शीर्ष अधिकारी शामिल हो रहे हैं।
इससे संकेत मिल रहे हैं कि इस यात्रा में कई बड़े रक्षा व ऊर्जा सौदे पक्के हो सकते हैं।
भारत एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम की अतिरिक्त यूनिट्स खरीदने पर विचार कर रहा है। वहीं रूस ने उन्नत लड़ाकू विमान SU-57 भारत को ऑफर किया है।
इसके अलावा, नागरिक परमाणु ऊर्जा सहयोग बढ़ाने पर भी गंभीर चर्चा होगी, जिसमें छोटे व लचीले न्यूक्लियर रिएक्टर की तकनीक भी शामिल है।
स्बेरबैंक और ऊर्जा कंपनियों की बड़ी भूमिका
रूस का सबसे बड़ा बैंक स्बेरबैंक भारत में रुपये के माध्यम से बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में निवेश करने को तैयार है।
वहीं रूस चाहता है कि भारत उसकी तेल कंपनियों को तकनीकी सपोर्ट दे, क्योंकि पश्चिमी प्रतिबंधों के कारण कई पुराने सप्लायर उपलब्ध नहीं हैं।
साथ ही भारत, सखालिन-1 में अपनी 20% हिस्सेदारी बहाल कराने की कोशिश कर सकता है।
भारत-रूस साझेदारी को नई गति मिलने की उम्मीद
रक्षा, ऊर्जा, परमाणु सहयोग और व्यापार—इन सभी क्षेत्रों में इस यात्रा से लंबे समय के लिए नई राह खुल सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि हाल की वैश्विक स्थिति और अमेरिका-रूस के बीच बातचीत के चलते भारत को रूस के साथ अधिक खुलकर आगे बढ़ने का मौका मिला है।







