छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। कुल 48 लाख रुपये के इनामी 15 माओवादी अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण कर चुके हैं। इनमें बटालियन नंबर-1 के चार सक्रिय सदस्य भी शामिल हैं—जो माओवादी संगठन की सबसे ताक़तवर रणनीतिक इकाई मानी जाती है।
आत्मसमर्पित माओवादियों ने खुलासा किया कि हाल ही में कुख्यात कमांडर हिड़मा की मौत और लगातार चल रहे संयुक्त सुरक्षा अभियानों से संगठन की रीढ़ टूट चुकी है। उनके मुताबिक, जंगलों में दबाव बढ़ने, रसद और संसाधनों की कमी और नेतृत्व के बिखराव ने बटालियन नंबर-1 को कमजोर कर दिया है, जिसके कारण दर्जनों नक्सली संगठन छोड़ने के लिए मजबूर हो रहे हैं।
एक पूर्व माओवादी सदस्य ने बातचीत में दावा किया कि जल्द ही बड़े माओवादी नेता बारसे देवा समेत कई वरिष्ठ कमांडर भी आत्मसमर्पण करने की तैयारी में हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह केंद्र और राज्य सरकारों के ‘नक्सल-मुक्त भारत 2026 अभियान’ की दिशा में सबसे बड़ा मोड़ साबित हो सकता है।
सरकार के अनुसार, बस्तर के घने जंगलों में लगातार नए सुरक्षा कैंप, सड़क निर्माण, और ड्रोन निगरानी के विस्तार ने माओवादियों के प्रभाव क्षेत्र को तेजी से सिमटा दिया है।







