छत्तीसगढ़ 10 नवंबर बलरामपुर जिले में उस समय तनाव फैल गया जब चोरी के एक मामले की जांच के दौरान पुलिस कस्टडी में 19 वर्षीय युवक उमेश सिंह की मौत हो गई। घटना की जानकारी मिलते ही मृतक के परिजनों ने थाने का घेराव कर पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। परिजनों का कहना है कि पुलिस ने उमेश के साथ हिरासत में बर्बरतापूर्ण मारपीट की, जिससे उसकी मौत हो गई। उन्होंने इस घटना को पुलिस द्वारा की गई जानबूझकर हत्या बताया और न्याय की मांग की।
घटना के अनुसार, 30-31 अक्टूबर की रात शहर के धनंजय ज्वेलर्स में लगभग 50 लाख रुपए के जेवर और नकदी की चोरी हुई थी। जांच के दौरान पुलिस को सीतापुर की “बाची गैंग” पर शक हुआ और कुल 9 संदिग्धों को हिरासत में लिया गया। इन्हीं में से एक था उमेश सिंह, जिसे चोरी का सामान बरामद कराने के लिए पुलिस टीम अपने साथ लेकर गई थी। पुलिस के मुताबिक, सामान बरामद करने के बाद जब टीम उमेश को लेकर लौट रही थी, तभी अचानक उसकी तबीयत बिगड़ गई। उसे तुरंत जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया।
हालांकि, मृतक के परिवार का कहना है कि उमेश पूरी तरह स्वस्थ था और पुलिस की मारपीट से ही उसकी जान गई। मृतक की मां और बहन ने पुलिस पर हत्या का आरोप लगाते हुए अस्पताल परिसर में हंगामा किया। तनाव की स्थिति को देखते हुए अस्पताल और थाना क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया
दूसरी ओर, पुलिस प्रशासन ने सफाई दी कि युवक पिछले एक वर्ष से सिकल सेल बीमारी से पीड़ित था। एएसपी डॉ. त्रिपाठी ने बताया कि शुरुआती जांच में उमेश की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई प्रतीत होती है और मारपीट के आरोप बेबुनियाद हैं। फिलहाल शव का पोस्टमॉर्टम कराया गया है, जिसकी रिपोर्ट आने के बाद वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
पोस्टमॉर्टम के बाद भी परिजनों ने शव लेने से इनकार कर दिया और दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग की। उन्होंने प्रशासन से निष्पक्ष जांच की गुहार लगाई। यह घटना एक बार फिर पुलिस कस्टडी में हुई मौत और गिरफ्तारी की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए इलाके में पुलिस बल की तैनाती बढ़ा दी है और मजिस्ट्रियल जांच के आदेश जारी किए हैं। फिलहाल बलरामपुर जिला इस घटना के बाद तनावपूर्ण स्थिति में है और लोग निष्पक्ष न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं।






