भाजपा में वंशवाद पर राजीव शुक्ला का वार, बोले– जय शाह अपवाद हैं

Madhya Bharat Desk
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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और बीसीसीआई उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला के हालिया बयान ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। एक ओर उन्होंने जय शाह (गृहमंत्री अमित शाह के पुत्र) की खुलेआम प्रशंसा की है जो वर्तमान में एसीसी और आईसीसी अध्यक्ष है और बीसीसीआई के पूर्व सचिव रहे है, वहीं दूसरी ओर यह बयान उन्हीं की पार्टी के नेता राहुल गांधी द्वारा जय शाह पर पूर्व में दिए गए तीखे बयानों के बिल्कुल विपरीत है।

राजीव शुक्ला का ‘पेशेवर’ समर्थन

राजीव शुक्ला ने जय शाह की प्रशंसा करते हुए कहा कि:

“भाजपा में वंशवाद की बात तो होती है, लेकिन जय शाह का उदाहरण इसमें फिट नहीं बैठता, क्योंकि वह राजनीति में नहीं हैं। उन्होंने क्रिकेट प्रशासन में अपनी मेहनत से काम किया है और अच्छे परिणाम दिए हैं।”

क्रिकेट प्रबंधन की सराहना: शुक्ला ने जय शाह की कार्यशैली और क्रिकेट प्रबंधन को संगठित और आधुनिक बनाने में उनकी बड़ी भूमिका की तारीफ की है।

वंशवाद पर स्पष्टीकरण: उन्होंने यह साफ किया कि चूंकि जय शाह किसी राजनीतिक पद या चुनावी राजनीति में सक्रिय नहीं हैं, इसलिए उन पर वंशवाद का आरोप लगाना उचित नहीं है।

यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि शुक्ला स्वयं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता होने के बावजूद एसीसी में एक उच्च पद (उपाध्यक्ष) पर हैं, इसलिए उनकी टिप्पणी को राजनीतिक से ज़्यादा पेशेवर और संस्थागत स्तर पर देखा जा रहा है।

राहुल गांधी का तीखा ‘वंशवाद’ वार

राजीव शुक्ला का यह बयान ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी जय शाह को लेकर वंशवाद और क्रिकेट प्रशासन पर लगातार हमलावर रहे हैं।

राहुल गांधी ने अपने चुनावी प्रचारों और जनसभाओं में कई बार यह दावा किया है कि जय शाह को क्रिकेट बैट पकड़ना भी नहीं आता, फिर भी वह देश के क्रिकेट बोर्ड को नियंत्रित कर रहे हैं। उनके बयानों का मुख्य निशाना बीजेपी पर वंशवाद को बढ़ावा देने और कुछ चुनिंदा लोगों को ही बड़े सपने देखने की अनुमति देने पर केंद्रित रहा है।

उदाहरण के लिए, राहुल गांधी ने सार्वजनिक रैलियों में कहा है कि अमित शाह के बेटे को क्रिकेट बैट पकड़ना नहीं आता, फिर भी वह क्रिकेट के चीफ हैं।

विरोधाभास: पार्टी लाइन या पेशेवर नैतिकता?

राजीव शुक्ला और राहुल गांधी के बयानों का यह विरोधाभास कांग्रेस के भीतर दो अलग-अलग दृष्टिकोणों को दर्शाता है:

  • राजीव शुक्ला: क्रिकेट प्रशासन में अपने पद के कारण वह जय शाह के कार्य प्रदर्शन को प्राथमिकता दे रहे हैं, भले ही वह सत्ताधारी पार्टी के नेता के बेटे हों।
  • राहुल गांधी: वह जय शाह के बहाने वंशवाद और सत्ता के दुरुपयोग के व्यापक राजनीतिक मुद्दे को उठा रहे हैं, जो उनकी पार्टी की मुख्य विचारधारा का हिस्सा रहा है।

राजीव शुक्ला का यह “आउट ऑफ टर्न” समर्थन, जहां एक ओर जय शाह के काम को एक अंतर-दलीय मान्यता देता है, वहीं दूसरी ओर यह कांग्रेस के उस राजनीतिक नैरेटिव को कमजोर करता है जो वर्षों से जय शाह को निशाना बनाता रहा है।

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