छत्तीसगढ़ के अस्पतालों में निकली घटिया दवाइयां, मरीजों में बढ़ा डर – सरकारी सिस्टम की साख पर उठे सवाल

Madhya Bharat Desk
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छत्तीसगढ़ के सरकारी अस्पतालों में अमानक दवाओं के मिलने का मामला राज्यभर में चिंता का विषय बन गया है। मरीजों की बढ़ती आशंकाओं के बीच सरकारी व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। अस्पतालों में मरीजों को दी जाने वाली कुछ दवाएं मानक गुणवत्ता पर खरी नहीं उतरीं, जिसके बाद इनकी खेप वापस मंगाई गई है। हालांकि, इस घटना ने सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने वाले गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों के बीच गहरा अविश्वास पैदा कर दिया है।

मरीज अब सरकारी अस्पतालों में मिलने वाली मुफ्त दवाओं को लेने से कतराने लगे हैं। उन्हें डर है कि कहीं दवा की गुणवत्ता खराब हुई तो बीमारी के ठीक होने के बजाय हालत और न बिगड़ जाए। इससे सरकारी चिकित्सा व्यवस्था पर जनता का भरोसा हिलता नजर आ रहा है।

गौरतलब है कि हाल ही में पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश के बालाघाट में घटिया कफ सिरप पीने से 23 बच्चों की मौत हो चुकी थी। इस दर्दनाक घटना के बाद पूरे देश में दवाओं की गुणवत्ता और सप्लाई चेन पर सवाल उठे थे। इसके बावजूद छत्तीसगढ़ में सरकारी अस्पतालों को दी जा रही दवाओं में भी अमानकता सामने आना स्वास्थ्य प्रणाली की गंभीर लापरवाही को उजागर करता है।

राज्य की स्वास्थ्य एजेंसी सीजीएमएससी (Chhattisgarh Medical Services Corporation) के माध्यम से अस्पतालों को दवाओं की आपूर्ति होती है। हाल के परीक्षणों में कुछ बैच अमानक पाए गए हैं। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने इन दवाओं की तुरंत वापसी और जिम्मेदार कंपनियों पर सख्त कार्रवाई की बात कही है। लेकिन अब तक ये कार्रवाई केवल बयानों तक सीमित दिखाई दे रही है।

मरीजों का कहना है कि बड़ी बीमारियों की ही नहीं, बल्कि सामान्य सर्दी-खांसी जैसी दवाओं तक में गुणवत्ता की कमी दिख रही है। ऐसे में सरकारी अस्पतालों का भरोसा लगातार कमजोर हो रहा है। जो मरीज पहले मुफ्त इलाज का लाभ उठाते थे, अब वे भी निजी मेडिकल स्टोर से दवाएं खरीदने को मजबूर हैं।

यह स्थिति न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की कमजोरी को उजागर करती है, बल्कि आम नागरिकों की सुरक्षा के प्रति शासन की संवेदनशीलता पर भी सवाल खड़े करती है। लोगों की जान से खिलवाड़ करने वाली कंपनियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई और गिरफ्तारी अब जनता की प्रमुख मांग बन गई है। सरकार के लिए यह चुनौतीपूर्ण समय है—या तो वह दवा आपूर्ति व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी बनाए, या जनता का भरोसा हमेशा के लिए खो दे।

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