त्याग, तपस्या और जनसेवा के पर्याय, महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पंडित राज किशोर तिवारी ‘दादाजी’ को उनकी पुण्यतिथि पर आज पूर्व विधायक डॉ. लीना तिवारी ने नम आँखों से स्मरण किया। स्थानीय राजनीति, शिक्षा जगत और सामाजिक संगठनों से जुड़े प्रतिष्ठित व्यक्तियों ने उनके मूर्ति स्थल पर पुष्पांजलि अर्पित कर, राष्ट्र के प्रति उनके समर्पित जीवन को नमन किया।
संघर्ष और सेवा का विराट व्यक्तित्व
पंडित राज किशोर तिवारी जी का जीवन स्वतंत्रता आंदोलन की अग्निपरीक्षा से तप कर निकला। उन्होंने न केवल भारत माता को गुलामी की बेड़ियों से मुक्त कराने के लिए संघर्ष किया, बल्कि स्वतंत्रता प्राप्ति के उपरांत भी आजीवन जनसेवा और समाज के उत्थान को ही अपना परम धर्म माना।
शिक्षा: सच्ची स्वतंत्रता का मूलमंत्र
उनकी दूरदर्शिता का सबसे बड़ा प्रमाण उनका शिक्षा के प्रति अटूट समर्पण था। उनका दृढ़ मत था:
“सच्ची स्वतंत्रता तभी है जब हर बच्चा शिक्षित हो।”
इस पावन विचार को मूर्तरूप देते हुए, उन्होंने अपना संपूर्ण सामर्थ्य ग्रामीण और निर्धन वर्गों तक शिक्षा की ज्योति पहुँचाने में लगा दिया। उनके अथक प्रयासों से स्थापित शैक्षणिक संस्थाएँ आज भी हज़ारों छात्रों के भविष्य को आलोकित कर रही हैं, जो उनके अमूल्य योगदान की साक्षात् गवाही हैं।
विरासत का वहन: आदर्शों की निरंतरता
पुण्यतिथि के इस गंभीर अवसर पर, उनके परिवारजनों और अनुयायियों ने सामूहिक रूप से उनके आदर्शों को हृदयंगम करने का संकल्प लिया। उनकी बहू, पूर्व विधायक श्रीमती लीना तिवारी (मड़ियाहूं, जिला जौनपुर, उत्तर प्रदेश) ने अपने उद्गार व्यक्त करते हुए कहा कि वे ‘दादाजी’ के पदचिन्हों पर चलते हुए शिक्षा और सामाजिक न्याय के उनके अधूरे स्वप्नों को साकार करने के लिए कटिबद्ध हैं।
उपस्थित सभी महानुभावों ने एक स्वर में स्वीकार किया कि पंडित राज किशोर तिवारी जी का जीवन एक गौरवशाली अध्याय है, जो पीढ़ी दर पीढ़ी को निःस्वार्थ सेवा, ईमानदारी और राष्ट्रप्रेम की प्रेरणा देता रहेगा। उन्हें अर्पित यह श्रद्धांजलि मात्र एक औपचारिकता नहीं, अपितु उनके पुण्य कार्यों के प्रति कृतज्ञता का प्रदर्शन है।



