विधानसभा चुनाव से पहले जनता दल (यूनाइटेड) को औरंगाबाद में बड़ा झटका लगा है। पार्टी की पूरी जिला कमेटी ने सामूहिक रूप से इस्तीफा दे दिया है। इस फैसले ने जदयू संगठन में भूचाल ला दिया है। पार्टी ने तुरंत पूर्व जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार सिंह को कार्यकारी जिलाध्यक्ष नियुक्त किया है ताकि संगठन में संतुलन बनाया जा सके।
प्रत्याशी चयन से नाराजगी
पूर्व जिलाध्यक्ष और पूर्व विधायक अशोक कुमार सिंह ने रविवार को प्रेस वार्ता में बताया कि रफीगंज विधानसभा सीट से जिस व्यक्ति को टिकट दिया गया है, वह जदयू का प्राथमिक सदस्य तक नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर टिकट किसी पुराने नेता या एनडीए सहयोगी को मिलता, तो किसी को आपत्ति नहीं होती। लेकिन इस निर्णय से कार्यकर्ताओं की भावना आहत हुई है। इसी वजह से पूरी जिला कमेटी ने पद से इस्तीफा दे दिया है।
अशोक सिंह ने स्पष्ट किया कि उन्होंने पार्टी नहीं, बल्कि केवल पद से इस्तीफा दिया है। वे जिले की बाकी पांचों विधानसभा सीटों पर एनडीए उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करने के लिए काम करते रहेंगे।
“नीतीश कुमार के साथ शमशान घाट तक”
अशोक सिंह ने कहा, “2009 में जब मैंने अपने पिता व पूर्व विधायक रामाधार सिंह की मौजूदगी में जदयू ज्वाइन किया था, तब नीतीश कुमार को वचन दिया था कि जीवनभर उनके साथ रहूंगा। मैं आज भी उसी वचन पर कायम हूं।” उन्होंने कहा कि पार्टी ने उन्हें 2010, 2015 और 2020 में टिकट दिया, लेकिन 2020 में जिनके कारण हार हुई, अब वही प्रत्याशी बना दिए गए हैं।
जिन्होंने झंडा फूंका, वही प्रत्याशी बने
अशोक सिंह ने बिना नाम लिए कहा, “जिस व्यक्ति ने कभी पार्टी का झंडा जलाया और नीतीश कुमार को गालियां दीं, आज वही उम्मीदवार बन गए हैं। यह कार्यकर्ताओं को मंजूर नहीं है।”
संगठन को घर-घर तक पहुंचाया
अशोक सिंह ने कहा कि अपने कार्यकाल में उन्होंने जदयू संगठन को हर बूथ तक मजबूत किया, गुटबाजी खत्म की और बीएलए-2 की नियुक्तियां कराईं। उन्होंने कहा, “मैं रफीगंज को छोड़कर जिले की बाकी सीटों पर एनडीए की जीत के लिए पूरी निष्ठा से काम करूंगा।”
‘शिष्टाचार’ भी भूल गए प्रत्याशी
अशोक सिंह ने आरोप लगाया कि रफीगंज प्रत्याशी बनने के बाद उस व्यक्ति ने उनसे या जिला संगठन से कोई संपर्क नहीं किया। उन्होंने बिना किसी चर्चा के सीधे नामांकन कर दिया।
नए कार्यकारी जिलाध्यक्ष की नियुक्ति
प्रदेश कमेटी ने धर्मेंद्र कुमार सिंह को कार्यकारी जिलाध्यक्ष बनाया है। उन्होंने कहा कि “मेरा मकसद रूठे हुए कार्यकर्ताओं को मनाना और संगठन को फिर से मजबूत करना है।”
‘छोटे भाई हैं, मान जाएंगे’ – प्रमोद सिंह
रफीगंज से जदयू प्रत्याशी प्रमोद सिंह ने कहा, “अशोक सिंह मेरे बड़े भाई जैसे हैं। राजनीति में नाराजगी होती रहती है, मैं उन्हें मना लूंगा। पार्टी में सब एकजुट होकर काम करेंगे।”



