UNHRC: संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) के 60वें सत्र की 34वीं बैठक में पाकिस्तान एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कठघरे में खड़ा हुआ। अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक शोधकर्ता जोश बोव्स ने पाकिस्तान में हो रहे मानवाधिकार हनन, जबरन गायब किए जा रहे लोगों और बलूचिस्तान संकट को उजागर करते हुए इस पर निगरानी बढ़ाने की मांग की।
बोव्स ने अपने संबोधन में कहा कि पाकिस्तान में जवाबदेही की गंभीर कमी है और बलूचिस्तान में लगातार संकट गहराता जा रहा है। उन्होंने यूरोपीय संघ (EU) की पाकिस्तान की जीएसपी प्लस स्थिति पर की गई टिप्पणियों का हवाला देते हुए कहा कि अब ठोस कार्रवाई की जरूरत है।
उन्होंने बताया कि पाकिस्तान वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में 158वें स्थान पर है। वहीं, धार्मिक स्वतंत्रता पर अमेरिकी आयोग (USCIRF) की 2025 रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान में ईशनिंदा के आरोपों में 700 से अधिक लोग जेलों में बंद हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में 300% ज्यादा है।
बलूच मानवाधिकार संगठन ‘पांक’ की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 की पहली छमाही में ही 785 लोग जबरन लापता कर दिए गए और 121 हत्याएं दर्ज हुईं। इसी तरह, पश्तून नेशनल जिरगा ने दावा किया कि वर्ष 2025 में भी 4000 से ज्यादा पश्तून लापता हैं।
मानवाधिकार कार्यकर्ता आरिफ आजकिया ने भी अपने संबोधन में पाकिस्तान के बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा प्रांतों में लंबे समय से चल रहे सैन्य अभियानों पर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि वहां गैर-न्यायिक हत्याएं, जबरन गायब करना और यातना जैसी घटनाएं लगातार हो रही हैं।
उन्होंने कहा कि हजारों बलूच और पश्तून नागरिकों को सेना ने जबरन गायब कर दिया है और अक्सर सामूहिक कब्रों का पता चलता है। महिलाएं और बच्चे अपने परिजनों की रिहाई के लिए लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन उन्हें भी पुलिस की कार्रवाई का सामना करना पड़ता है।
आजकिया ने हाल ही में लाए गए पाकिस्तान के नए अस्थायी कानून की भी आलोचना की, जिसके तहत किसी भी व्यक्ति को अदालत में पेश किए बिना 90 दिनों तक हिरासत में रखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि यह कानून अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संधियों का उल्लंघन है।
अपने समापन में उन्होंने यूएनएचआरसी से अपील की कि पाकिस्तान को मूलभूत अधिकारों का सम्मान करने के लिए मजबूर किया जाए और बलूचिस्तान व खैबर पख्तूनख्वा में एक संयुक्त राष्ट्र तथ्यान्वेषी टीम भेजी जाए।







