छत्तीसगढ़ और पड़ोसी राज्यों में सक्रिय नक्सली संगठन ने साफ कर दिया है कि वे शांति वार्ता के लिए तैयार नहीं हैं और हथियारबंद संघर्ष जारी रहेगा। नक्सलियों का कहना है कि उनका संगठन क्रांतिकारी पार्टी के रूप में ही काम करता रहेगा और किसी भी तरह के समझौते की गुंजाइश नहीं है।
हाल ही में सोशल मीडिया और कुछ मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर एक प्रेस नोट वायरल हुआ था, जिसमें नक्सलियों के शांति वार्ता के लिए तैयार होने का दावा किया गया था। लेकिन नक्सलियों ने इसे पूरी तरह खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि यह प्रेस नोट फर्जी है और इसका उनसे कोई लेना-देना नहीं है।
नक्सलियों ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी लड़ाई व्यवस्था परिवर्तन के लिए है और यह संघर्ष राजनीतिक-सामाजिक स्तर पर जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि सरकार से समझौता करना या हथियार छोड़ना उनके एजेंडे का हिस्सा नहीं है।
इस बयान से एक बार फिर यह साफ हो गया है कि नक्सल समस्या का हल अभी निकट भविष्य में आसान नहीं है। राज्य और केंद्र सरकार लगातार विकास कार्यों और सुरक्षा बलों की तैनाती के जरिए नक्सली गतिविधियों को खत्म करने का प्रयास कर रही हैं, लेकिन नक्सलियों का यह रुख सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बना हुआ है।



