बारनवापारा अभयारण्य में शावक की मौत से वन भैंसा संरक्षण पर उठे सवाल

Madhya Bharat Desk
2 Min Read

वन्यजीव संरक्षण किसी भी राज्य और देश की जैव विविधता बनाए रखने के लिए अत्यंत आवश्यक है। छत्तीसगढ़ का राजकीय पशु ‘वन भैंसा’ आज विलुप्ति के कगार पर है। इसकी घटती संख्या ने हमेशा से ही चिंता पैदा की है। हाल ही में बारनवापारा अभयारण्य में वन विभाग की ओर से संरक्षित समूह में जन्मे एक शावक की अचानक मौत ने संरक्षण योजनाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

घटना का विवरण

8 सितंबर 2025 को बारनवापारा अभयारण्य में वन भैंसों के समूह में दो शावकों का जन्म हुआ। लेकिन मात्र सात दिनों बाद, यानी 15 सितंबर को एक शावक की अचानक मौत हो गई। विभागीय सूत्रों के अनुसार शावक की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई, परंतु इतनी जल्दी मृत्यु होना चिंता का विषय है। यह वही समूह है जिसमें असम से लाए गए वन भैंसों को रखा गया है।

छत्तीसगढ़ में वन भैंसों की स्थिति

छत्तीसगढ़ में वन भैंसा राज्य का राजकीय पशु है, किंतु इनकी संख्या अत्यंत सीमित हो चुकी है। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में केवल एक नर भैंसा ‘छोटू’ बचा है, जो अब वृद्धावस्था में है। इसी कारण 2020 में असम से एक नर और एक मादा भैंसा लाकर समूह को मजबूत किया गया। बाद में 2023 में चार और भैंसों को जोड़ा गया। पिछले वर्ष दो शावकों का जन्म हुआ था और इस वर्ष भी दो शावक पैदा हुए, लेकिन हाल की घटना से उम्मीदों को गहरा झटका लगा है।

संरक्षण प्रयास और चुनौतियाँ

वन विभाग और सरकार लगातार प्रयास कर रही है कि इनकी संख्या बढ़ाई जाए और प्रजाति को बचाया जा सके। लेकिन बार-बार शावकों की मौत होना इस परियोजना की सफलता पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि उचित देखभाल, बेहतर चिकित्सीय सुविधा और प्राकृतिक अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराना ही इनकी सुरक्षा के लिए आवश्यक है।

Share on WhatsApp

Share This Article
Leave a Comment