छत्तीसगढ़ कांग्रेस का ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ अभियान जहां भाजपा सरकार पर बड़ा राजनीतिक हमला साबित हो रहा है, वहीं यह पार्टी के भीतर की गुटबाजी और अंदरूनी खींचतान को भी उजागर कर रहा है।
प्रदेश कांग्रेस में लंबे समय से खींचतान की स्थिति बनी रही है। भूपेश बघेल और टी.एस. सिंहदेव के बीच टकराव कई बार खुलकर सामने आ चुका है। इसी तरह संगठन स्तर पर दीपक बैज और चरणदास महंत के गुटों में भी खामोश प्रतिस्पर्धा रहती है, जो कई मौकों पर भीतरखाने चर्चा का विषय रही है।
अब जब सचिन पायलट प्रदेश प्रभारी के तौर पर इस अभियान की कमान संभाल रहे हैं, तो सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या वे इन गुटबाजियों को संतुलित कर पाते हैं या नहीं। आमतौर पर बड़े अभियान और प्रदर्शनों में कांग्रेस नेता एकजुटता दिखाने की कोशिश करते हैं, लेकिन भीतरखाने मतभेद बने रहते हैं।
यह अभियान भाजपा के खिलाफ मजबूत राजनीतिक संदेश देने के साथ-साथ कांग्रेस की एकजुटता की भी अहम परीक्षा साबित होगा। यदि बड़े नेता आपसी खींचतान में उलझे रहे तो अभियान कमजोर होगा, लेकिन अगर सभी धड़े एक मंच पर मजबूती से खड़े हुए तो भाजपा के खिलाफ माहौल बनाने में कांग्रेस को लाभ मिल सकता है।
कांग्रेस ने इस अभियान को और धार देने के लिए प्रदेश प्रभारी सचिन पायलट को मैदान में उतारा है। राहुल गांधी की पदयात्रा के बाद अब सचिन पायलट भी 16 से 18 सितंबर तक प्रदेश में पदयात्रा और सभाएं करेंगे। पार्टी की ओर से मिली जानकारी के अनुसार—
- 16 सितंबर को रायगढ़ से कोरबा,
- 17 सितंबर को मुंगेली और कोरबा,
- 18 सितंबर को राजनांदगांव से दुर्ग तक पदयात्रा और सभाएं होंगी।
इसके साथ ही हस्ताक्षर अभियान और घर-घर जाकर जनसंपर्क भी किया जाएगा।







