रायपुर।छत्तीसगढ़ में सरकार और NHM संविदा कर्मचारियों के बीच टकराव गहराता जा रहा है। सरकार ने 10 सूत्रीय मांगों को लेकर हड़ताल कर रहे सभी कर्मचारियों को 24 घंटे के भीतर काम पर लौटने का आदेश दिया है। साथ ही चेतावनी दी है कि आदेश नहीं मानने पर कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दी जाएंगी।
संविदा कर्मचारियों की नाराजगी
कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने अपनी मांगों को लेकर अब तक 160 से अधिक बार ज्ञापन दिया है, लेकिन सरकार ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। अब जब उन्होंने हड़ताल का रास्ता अपनाया है तो सरकार अल्टीमेटम दे रही है। कर्मचारियों का आरोप है कि सरकार अपनी जिम्मेदारी से बच रही है और उनके साथ अन्याय कर रही है।
विपक्ष में थे तो करते थे समर्थन, अब नज़रें फेर लीं
हड़ताली कर्मचारियों का कहना है कि जब वर्तमान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, उप मुख्यमंत्री अरुण साव और वित्त मंत्री ओपी चौधरी विपक्ष में थे, तब यही नेता धरना-प्रदर्शन में शामिल होते थे और संविदा कर्मियों के साथ हमदर्दी जताते थे। लेकिन सत्ता में आने के बाद वही संविदा कर्मचारी सरकार को चुभने लगे हैं।

वादों से पलटी सरकार
कर्मचारियों का आरोप है कि सरकार ने विधानसभा चुनाव के दौरान संविदा कर्मियों से जुड़े कई वादे किए थे। यहां तक कि इसे “मोदी की गारंटी” के रूप में प्रचारित किया गया था। लेकिन चुनाव जीतने के दो साल बाद भी सरकार ने अपने घोषणापत्र के वादों को पूरा नहीं किया।
जनता का भरोसा डगमगाने का खतरा
कर्मचारियों का कहना है कि अगर राजनीतिक दल इसी तरह घोषणापत्र के वादों से पीछे हटते रहे तो जनता भविष्य में उनके वचनों पर भरोसा नहीं करेगी। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगला विधानसभा चुनाव इस धोखे का जवाब देगा।






