अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूरोपीय देशों से भारत पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाने की मांग की है। इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के अनुसार, व्हाइट हाउस के तहत ट्रंप प्रशासन ने न सिर्फ भारत पर सेकेंडरी टैरिफ लगाने की बात कही है, बल्कि यूरोपीय देशों से यह भी कहा है कि वे भारत से तेल और गैस खरीदना बंद करें।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ट्रंप पहले ही भारत पर 50% टैरिफ लागू कर चुके हैं, जिसमें रूस से तेल खरीदने पर 25% अतिरिक्त पेनल्टी भी शामिल है। ट्रंप प्रशासन का यह कदम भारत की ऊर्जा और व्यापार नीति को प्रभावित करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
भारत का रुख स्पष्ट: दबाव में नहीं झुकेगा देश
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत इस तरह के किसी भी बाहरी दबाव के आगे नहीं झुकेगा। इतिहास गवाह है कि 1998 में जब भारत ने परमाणु परीक्षण किए थे, तब भी अमेरिका समेत कई देशों ने कड़े प्रतिबंध लगाए थे, लेकिन भारत ने अपने राष्ट्रीय हितों और रणनीतिक स्वायत्तता से समझौता नहीं किया।
भारत एक स्वाभिमानी राष्ट्र है और अपनी स्वतंत्र विदेश नीति के लिए प्रतिबद्ध है। विश्लेषकों का कहना है कि चाहे अमेरिका या कोई भी अन्य देश दबाव बनाए, भारत अपने रणनीतिक फैसले खुद लेगा और राष्ट्रीय हित सर्वोपरि रखेगा।
आज भी यही होगा। भारत किसी भी कीमत पर अपने राष्ट्रीय हितों और स्वाभिमान से समझौता नहीं करेगा। ट्रंप यह भूल रहे हैं कि जितना दबाव भारत पर डालेंगे, उतना ही भारत और मज़बूत और आक्रामक होकर सामने आएगा।
अमेरिका को समझ लेना चाहिए– भारत को धमकाना आसान नहीं। यह नया भारत है, जो अपनी शर्तों पर दुनिया से रिश्ते निभाता है।







