बिहार की जनता ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वो जाति और धर्म की सीमाओं से ऊपर उठकर बदलाव की ओर बढ़ रही है।
आलोचक जो यह आरोप लगाते थे कि बिहार के लोग केवल जातीय समीकरणों तक सीमित रहते हैं, उन्हें इस जागृत भीड़ ने करारा जवाब दिया है।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में उमड़ी हुई भीड़ इस बात का सबूत है कि यह कोई कृत्रिम या पैसों से जुटाई भीड़ नहीं, बल्कि असली जनसमर्थन है।
लोगों का कहना है कि जो विरोधी नेता यह कहते थे कि प्रशांत किशोर भीड़ पैसे से जुटाते हैं, उनके मुंह पर यह वीडियो सीधा तमाचा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पैसे खर्च करके भी ऐसा जनक्रेज़ पैदा नहीं किया जा सकता जैसा कि इस वीडियो में दिख रहा है।
भीड़ का जोश और ऊर्जा इस बात की गवाही दे रही है कि बिहार अब नई राजनीति की ओर बढ़ चुका है।







