राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) ने छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले मामले में एक बड़ा कदम उठाया है। रायपुर की विशेष अदालत में मंगलवार को 8,000 पन्नों का चालान पेश किया गया। यह मामला 3,200 करोड़ रुपए के शराब घोटाले से जुड़ा हुआ है।
चालान में यह स्पष्ट किया गया है कि विदेशी शराब पर अवैध कमीशन लिया गया और उसी आधार पर एक संगठित सिंडिकेट तैयार किया गया। इस सिंडिकेट के माध्यम से राज्य को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। जांच रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि शराब वितरण में अपनाई गई नई नीति के चलते राज्य को 248 करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान हुआ।
चालान में कई बड़े नाम शामिल हैं, जिनमें विजय कुमार भाटिया, संजय मिश्रा, मनीष मिश्रा और अभिषेक सिंह को मुख्य आरोपी बनाया गया है। ये सभी आरोपी वर्तमान में जेल में निरुद्ध हैं। इसके अलावा, अन्य कंपनियों से जुड़े लोगों के खिलाफ भी अलग से अभियोग पत्र दायर किए जाएंगे।
यह घोटाला न केवल भ्रष्टाचार का बड़ा उदाहरण है बल्कि यह भी दर्शाता है कि किस तरह अवैध गतिविधियों से सरकारी राजस्व पर चोट पहुंचती है। ऐसे मामलों से निपटने के लिए सख्त जांच और कठोर दंड की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति या संगठन राज्य की आर्थिक नीतियों और जनहित के साथ खिलवाड़ करने का साहस न कर सके।







