पश्चिम बंगाल में कथित तौर पर 35-40 लाख फर्जी वोटरों को लेकर कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी के हालिया बयान ने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है। चौधरी के इस खुलासे ने न केवल सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर सवाल उठाए हैं, बल्कि पार्टी के भीतर ही राहुल गांधी के उस नैरेटिव को भी चुनौती दी है, जिसमें वह भाजपा पर ‘वोट चोरी’ का आरोप लगाते रहे हैं।
अधीर रंजन चौधरी, जो पश्चिम बंगाल में कांग्रेस के एक प्रमुख चेहरे और लोकसभा में पार्टी के नेता भी हैं, ने खुले तौर पर दावा किया है कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार ने राज्य में 35 से 40 लाख ‘फर्जी वोटर’ बनाए हैं। यह एक गंभीर आरोप है, जो चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल उठाता है।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में राजनीतिक माहौल गरमाया हुआ है और राहुल गांधी लगातार भाजपा पर ईवीएम और चुनावी प्रक्रिया में धांधली कर वोट चुराने का आरोप लगा रहे हैं। चौधरी का यह खुलासा, जिसमें वह अपनी ही गठबंधन सहयोगी (और राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी दल) टीएमसी पर फर्जी वोटरों का आरोप लगा रहे हैं, राहुल गांधी के इस नैरेटिव को कमजोर करता दिख रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अधीर रंजन चौधरी का यह बयान कांग्रेस के लिए दोहरी चुनौती पेश करता है। एक ओर, यह पश्चिम बंगाल में टीएमसी के खिलाफ उनकी पार्टी की लड़ाई को दर्शाता है। दूसरी ओर, यह राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा के खिलाफ कांग्रेस के ‘वोट चोरी’ के आरोपों की धार को कुंद कर सकता है, क्योंकि अब खुद उनकी पार्टी के नेता ने एक अन्य विपक्षी दल पर बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े का आरोप लगाया है।
यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस पार्टी इस विरोधाभासी स्थिति से कैसे निपटती है और क्या यह बयान आगामी चुनावों में उसके चुनावी अभियानों को प्रभावित करेगा।







