कांग्रेस-भाजपा के समधी नेताओं की डील बेनक़ाब

Madhya Bharat Desk
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नवा रायपुर, छत्तीसगढ़: नवा रायपुर में जमीन की बिक्री पर आधिकारिक रोक के बावजूद बड़े पैमाने पर विवादास्पद भूमि सौदों का खुलासा हुआ है, जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। सूत्रों के अनुसार, पिछले तीन साल से प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच से फरार चल रहे कांग्रेस के एक वरिष्ठ कोषाध्यक्ष ने पिछले 5-6 महीनों में सबसे अधिक जमीनें खरीदी हैं, जो संदेह के घेरे में हैं।

यह मामला तब और भी चौंकाने वाला हो गया जब इस पूरे जमीन खरीद-फरोख्त के खेल में कांग्रेस कोषाध्यक्ष के साथ-साथ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक पूर्व कोषाध्यक्ष और वरिष्ठ नेता का नाम भी सामने आया। सूत्रों का दावा है कि ये दोनों नेता आपस में समधी हैं, और भूपेश बघेल सरकार के कार्यकाल के दौरान कथित तौर पर उनकी मिलीभगत से ‘माय फेयर होटल’ के आसपास करीब 100 एकड़ जमीन की बड़े पैमाने पर खरीद-फरोख्त की गई।

सूत्रों के मुताबिक, इस कथित घोटाले में अधिकारियों की सांठगांठ भी उजागर हुई है। बताया जा रहा है कि इन विवादित जमीनों तक पहुंचने के लिए एक विशेष सड़क का निर्माण किया जा रहा है, जिसका कोई वास्तविक या व्यावहारिक औचित्य नहीं है। स्थानीय लोगों और विशेषज्ञों का मानना है कि यह सड़क केवल इन निजी भूमि सौदों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से बनाई जा रही है।

इस बीच, खरीदी गई जमीन पर तेजी से मकानों का निर्माण भी शुरू हो गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि ये सौदे केवल निवेश के लिए नहीं बल्कि तत्काल विकास और लाभ कमाने के इरादे से किए गए हैं।

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