मोहन भागवत और प्रशांत किशोर की ‘डबल अटैक’ — स्वास्थ्य-शिक्षा पर सरकार को आईना!

Madhya Bharat Desk
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने स्वास्थ्य और शिक्षा पर ऐसा बयान दिया, जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी। भागवत ने कहा—

“स्वास्थ्य और शिक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण हैं और पहले इन्हें सेवा माना जाता था, लेकिन अब दोनों आम लोगों की पहुंच से बाहर हैं। दोनों का व्यवसायीकरण हो गया है। ये न तो सस्ती हैं और न ही सुलभ।”

भागवत के यह शब्द ऐसे समय में आए हैं जब जन सुराज अभियान के नेता प्रशांत किशोर बिहार में लगातार यही मुद्दे उठा रहे हैं। किशोर ने कई बार तंज कसते हुए कहा कि बिहार में स्कूल और अस्पताल का हाल ऐसा है कि लोग इलाज के बजाय ‘भगवान भरोसे’ और पढ़ाई के बजाय ‘कोचिंग भरोसे’ हैं।

क्या है दिलचस्प?

भागवत और किशोर—एक संघ की विचारधारा का चेहरा, दूसरा राजनीतिक रणनीतिकार से जनआंदोलनकारी बने—दोनों अलग-अलग दुनिया के लोग हैं। लेकिन जब दोनों की जुबान से एक ही दर्द छलकने लगे, तो समझिए बात गंभीर है।

सरकार के लिए सिग्नल:

राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि भागवत का यह बयान किसी साधारण ‘संघ भाषण’ जैसा नहीं है, बल्कि सरकार के लिए एक चेतावनी है—”जनता को स्वास्थ्य-शिक्षा में राहत दीजिए, वरना जनता आपको राहत दे देगी!”

सत्ता पक्ष इस बयान पर भले चुप्पी साधे, लेकिन विपक्ष के लिए यह गोल्डन चांस है। क्योंकि अगर संघ प्रमुख भी यही कह रहे हैं, तो विपक्ष बोलेगा—”देखिए, अब तो घर के लोग भी सच बोल रहे हैं!”

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