रायपुर। छत्तीसगढ़ में जल जीवन मिशन एक बार फिर बड़े घोटाले की आंच में घिर गया है। पेमेंट वितरण में भारी अनियमितताओं का मामला उजागर होने के बाद अब अधिकारी, मंत्री के ओएसडी और उनके करीबी नेताओं पर बर्खास्तगी की मांग तेज हो गई है।
128 करोड़ मल्टी विलेज ठेकेदारों को, सिर्फ 79 करोड़ सिंगल विलेज के लिए
ताजा जानकारी के मुताबिक, विभाग ने मल्टी विलेज प्रोजेक्ट्स के ठेकेदारों के लिए 128 करोड़ रुपये का भुगतान जारी किया है, जबकि सिंगल विलेज योजनाओं के लिए महज 79 करोड़ रुपये ही दिए गए हैं।


इस भुगतान में भी हैदराबाद और बाहरी राज्यों के ठेकेदारों को प्राथमिकता दी गई है। स्थानीय ठेकेदारों का कहना है कि यह फैसला पूरी तरह से पक्षपातपूर्ण है, जिससे छत्तीसगढ़ के करीब 2000 ठेकेदारों का हक मारा गया है।


पुराने विवाद की पृष्ठभूमि
इससे पहले भी वित्त विभाग ने जल जीवन मिशन में भुगतान को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए थे कि सिंगल विलेज योजनाओं में प्राथमिकता से भुगतान हो।
लेकिन नियमों की खुलेआम अवहेलना करते हुए कई जिलों में मल्टी विलेज प्रोजेक्ट्स को प्राथमिकता दी गई और हैदराबाद के चुनिंदा ठेकेदारों को ही भुगतान किया गया।
वित्त विभाग ने इस पर पहले जांच का आश्वासन दिया था, लेकिन जांच आज तक पूरी नहीं हो पाई।
अब जब दोबारा वही पैटर्न सामने आया है, तो आरोपों ने गंभीर रूप ले लिया है कि विभाग के भीतर “कमिशन का खेल” चल रहा है।
अधिकारियों और नेताओं की मिलीभगत के आरोप
सूत्रों के अनुसार, इस पूरे मामले में एडिशनल MD, MD, मंत्री के OSD और जगदलपुर में मंत्री के करीबी नेता सीधे तौर पर शामिल बताए जा रहे हैं। यहां तक छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री के गृह जिले में भी सिंगल विलेज के ठेकेदारों का भुगतान अटका हुआ है इसका सीधा अर्थ तो यही है कि इसमें शामिल अधिकारियां मुख्यमंत्री से भी ऊपर है। ठेकेदारों का कहना है कि इन अधिकारियों ने “मल्टी विलेज ठेकेदारों को अधिक भुगतान” का फैसला मिलकर लिया ताकि भारी कमीशन वसूला जा सके।
इस मामले के सामने आने के बाद ठेकेदारों में गुस्सा और आक्रोश बढ़ गया है। वे इसे “जनता का हक छीनने और अफसरशाही की मिलीभगत से भ्रष्टाचार करने की साजिश” बता रहे हैं।
ठेकेदारों की खुली मांग – बर्खास्तगी हो जिम्मेदार अधिकारियों की
प्रदेशभर के ठेकेदारों ने अब आवाज उठाई है कि इस पूरे मामले में शामिल अधिकारियों पर तुरंत जांच और बर्खास्तगी की कार्रवाई की जाए।
उनका कहना है कि —
“जब हर घर तक नल पहुंचाने का हक जनता का है, तो उसका पैसा कुछ चुनिंदा लोगों को क्यों दिया जा रहा है? जल जीवन मिशन अब जल-जीवन नहीं, ‘वसूली मिशन’ बन गया है।”
ठेकेदारों का यह भी आरोप है कि मंत्री के संरक्षण में बैठे कुछ अधिकारी और उनके ओएचडी “राजनीतिक लाभ” के लिए इस पूरी प्रक्रिया को नियंत्रित कर रहे हैं।
जनता का हक या अफसरों का खेल?
जल जीवन मिशन का उद्देश्य था — हर घर तक स्वच्छ जल की पहुंच।
लेकिन अब यह योजना कमीशनखोरी, सिफारिश और भ्रष्टाचार के जाल में उलझती जा रही है।
सवाल यह है कि —
क्या सरकार इस भ्रष्टाचार पर नकेल कस पाएगी या मंत्री और अफसरशाही की गठजोड़ छत्तीसगढ़ के लोगों का हक यूं ही छीनती रहेगी?



