बिहार की सियासत में जारी उठापटक के बीच कांग्रेस के अंदर भी गहन मंथन शुरू हो गया है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बिहार प्रभारी कृष्णा अल्लावरू को सख्त लहजे में कहा है कि “गठबंधन बचाने के नाम पर कांग्रेस की पहचान या सिद्धांतों की तिलांजलि नहीं दी जा सकती।”
राहुल गांधी का यह बयान इस बात का संकेत है कि कांग्रेस अब बिहार में अपनी राजनीतिक जमीन को मजबूत करने के लिए किसी भी तरह की “फ्रेंडली फाइट” या गठबंधन दबाव की राजनीति से समझौता करने के मूड में नहीं है। पार्टी राज्य में स्वतंत्र, सशक्त और आत्मनिर्भर संगठन के रूप में उभरना चाहती है।
राजेश राम के तेवर गरम, कार्यकर्ताओं में जोश
इधर, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने भी संगठन के प्रति अपना सख्त रुख दिखाया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए लिखा:
“दलित झुकेगा नहीं, रुकेगा नहीं। INDIA फर्स्ट, संगठन सर्वोपरि।”
राजेश राम ने साफ किया कि चुनाव में कोई ‘फ्रेंडली फाइट’ नहीं होती, हर लड़ाई विचारधारा और सम्मान की होती है। उनका संदेश कार्यकर्ताओं के बीच जोश और एकजुटता बढ़ाने वाला माना जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों की राय
विश्लेषकों का कहना है कि कांग्रेस का यह रुख बिहार की गठबंधन राजनीति में नया मोड़ ला सकता है। पार्टी अब अपने संगठन को सर्वोपरि मानते हुए चुनावी रणनीति तैयार कर रही है। इससे आगामी विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की भूमिका निर्णायक बन सकती है।
राजनीतिक तौर पर यह कदम कांग्रेस को ‘गठबंधन पर आश्रित’ छवि से बाहर निकालकर ‘स्वतंत्र पहचान’ दिलाने की दिशा में अहम साबित हो सकता है।







