जहां एक ओर छत्तीसगढ़ को लगातार बढ़ती शराब खपत के कारण “शराब प्रधान राज्य” बनने की आलोचना झेलनी पड़ रही है, वहीं अब सूखे नशे की खेती को लेकर भी गंभीर सवाल उठने लगे हैं। बलरामपुर जिले में अफीम की अवैध खेती की बार-बार सामने आ रही सूचनाओं ने प्रशासनिक निगरानी और सरकारी तंत्र की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कुसमी थाना क्षेत्र के ग्राम चंदाडांडी में करीब 9 एकड़ जमीन पर अफीम की खेती किए जाने की चर्चा के बाद प्रशासन, पुलिस और वन विभाग की टीम ने सर्च अभियान शुरू किया है। हालांकि आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन स्थानीय स्तर पर लगातार मिल रही सूचनाओं से साफ है कि सूखे नशे की खेती करने वालों के हौसले बुलंद हैं।
इससे पहले भी इसी क्षेत्र के गांवों में अफीम की खेती की खबर सामने आ चुकी है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिरकार सरकार और प्रशासन की निगरानी व्यवस्था इतनी कमजोर क्यों है कि खुलेआम नशे की खेती होने की आशंका बार-बार सामने आ रही है?
आलोचकों का कहना है कि जिस राज्य में पहले से ही शराब की बिक्री को लेकर सरकार पर सवाल उठते रहे हैं, वहां अब सूखे नशे की खेती का बढ़ना चिंता का विषय बनता जा रहा है। यदि समय रहते सख्त निगरानी और कार्रवाई नहीं की गई, तो छत्तीसगढ़ नशे के एक नए संकट की ओर बढ़ सकता है।
फिलहाल कलेक्टर राजेंद्र कटारा और पुलिस अधीक्षक वैभव बैंकर ने पूरे जिले में सघन जांच के निर्देश दिए हैं। राजस्व, पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीम संभावित क्षेत्रों में जांच कर रही है। लेकिन बड़ा सवाल यही है कि क्या यह कार्रवाई पर्याप्त है या फिर नशे की खेती पर लगाम लगाने के लिए और सख्त कदम उठाने की जरूरत है?







