छत्तीसगढ़ में विकास की प्राथमिकताएं: शिक्षकों का संघर्ष और भव्य विधानसभा भवन

Madhya Bharat Desk
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छत्तीसगढ़: एक ओर जहाँ छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में शिक्षकों को जान जोखिम में डालकर उफनती नदियों को तैरकर पार करना पड़ता है, ताकि वे बच्चों को शिक्षा दे सकें, वहीं दूसरी ओर प्रदेश की राजधानी में 273 करोड़ रुपये की लागत से एक आलीशान नया विधानसभा भवन बनकर तैयार हो गया है। यह विरोधाभासी तस्वीर राज्य में विकास की प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। ग्रामीण क्षेत्रों की बुनियादी ज़रूरतों और शिक्षा के लिए फंड और ठोस योजनाओं की कमी लगातार चिंता का विषय बनी हुई है।

शिक्षा का संघर्ष: जान जोखिम में डालकर पढ़ाते शिक्षक

राज्य के कई सुदूर और आदिवासी बहुल इलाकों में, विशेषकर मानसून के दौरान, पुलों और सड़कों के अभाव में ग्रामीण क्षेत्रों का संपर्क टूट जाता है। ऐसे में बच्चों का भविष्य सँवारने का जिम्मा उठाए शिक्षक अपनी जान हथेली पर लेकर नदी-नाले पार करने को मजबूर हैं। सोशल मीडिया पर अक्सर ऐसी तस्वीरें और वीडियो सामने आते हैं, जिनमें शिक्षक बाढ़ग्रस्त नदियों को तैरकर या किसी तरह पार करते दिखते हैं। यह स्थिति न केवल शिक्षकों के लिए खतरनाक है, बल्कि बच्चों की शिक्षा में भी बड़ी बाधा बनती है। ग्रामीण अभिभावकों का कहना है कि हर साल बरसात में यही हाल होता है और बच्चों की पढ़ाई ठप हो जाती है।

भव्य विधानसभा भवन: 273 करोड़ रुपये का खर्च

राजधानी रायपुर में बना नया विधानसभा भवन, जिसकी लागत 273 करोड़ रुपये बताई जा रही है, राज्य के भव्य विकास का प्रतीक है। आधुनिक सुविधाओं से लैस यह भवन राज्य की प्रशासनिक क्षमता को दर्शाता है। हालांकि, इसकी तुलना ग्रामीण क्षेत्रों की बदहाल स्थिति से करने पर जनमानस में यह सवाल उठ रहा है कि क्या सरकार की प्राथमिकताएं सही दिशा में हैं। स्थानीय लोगों और विपक्षी दलों का तर्क है कि जहाँ करोड़ों रुपये की लागत से आलीशान इमारतें खड़ी की जा रही हैं, वहीं बुनियादी शिक्षा, स्वास्थ्य और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए गाँवों को संघर्ष करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों की उपेक्षा: न फंड न कोई ठोस योजना

ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए पर्याप्त फंड और प्रभावी योजनाओं का अभाव इस समस्या को और गहरा कर रहा है। किसानों, मजदूरों और आम ग्रामीणों को रोज़गार, स्वास्थ्य सुविधाओं और बेहतर शिक्षा के लिए तरसना पड़ता है। कई गाँवों में आज भी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए स्कूल भवन तक नहीं हैं। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि सरकार को शहरी विकास के साथ-साथ ग्रामीण भारत की ओर भी ध्यान देना चाहिए, क्योंकि असली छत्तीसगढ़ गाँवों में ही बसता है। ग्रामीण क्षेत्रों में पुलों के निर्माण, पक्की सड़कों, और शिक्षा के बुनियादी ढाँचे पर खर्च करना कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।

यह स्थिति राज्य सरकार के लिए एक चुनौती प्रस्तुत करती है कि वह किस तरह शहरी और ग्रामीण विकास के बीच संतुलन साधती है और हाशिए पर पड़े वर्गों की ज़रूरतों को पूरा करती है।

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