रायपुर में आज नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई को लेकर केंद्र और नक्सल प्रभावित राज्यों के बीच अहम बैठकों का दौर शुरू हो गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हो रही इन उच्चस्तरीय बैठकों को मार्च 2026 की तय समय-सीमा से पहले की सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक पहल माना जा रहा है।
बैठकों का मकसद साफ है—देश से सशस्त्र नक्सलवाद का पूरी तरह खात्मा और प्रभावित इलाकों में विकास की रफ्तार तेज करना।
सुबह शुरू हुई पहली समीक्षा बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा, राज्य के गृह विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, पुलिस महानिदेशक सहित देश के नक्सल प्रभावित राज्यों के डीजीपी, गृह सचिव और शीर्ष सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारी मौजूद हैं।
बैठक के दौरान नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की मौजूदा सुरक्षा स्थिति, खुफिया तंत्र की मजबूती, सुरक्षाबलों के ऑपरेशन की गति और शेष बचे संवेदनशील इलाकों में कार्रवाई को और प्रभावी बनाने पर गहन चर्चा हो रही है। तय समय सीमा के भीतर नक्सलवाद के अंतिम ठिकानों को खत्म करने के लिए ठोस और समयबद्ध एक्शन प्लान पर मंथन किया जा रहा है।
दिनभर चलेगा रणनीतिक मंथन
यह उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक दोपहर 12:45 बजे तक चलेगी। इसके बाद दूसरी बैठक दोपहर 2 बजे तक होगी। दोपहर 2 से 3 बजे तक लंच ब्रेक के बाद शाम 3 से 4:15 बजे तक फिर से विस्तृत चर्चा की जाएगी।
शाम 5 बजे से 6:10 बजे तक “छत्तीसगढ़ @ 25 – शिफ्टिंग द लेंस” विषय पर राष्ट्रीय कॉन्क्लेव का आयोजन प्रस्तावित है, जिसमें राज्य के भविष्य, विकास और बदलते दृष्टिकोण पर फोकस किया जाएगा।

दो अहम एजेंडों पर होगा अंतिम फैसला
उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने बताया कि यह 31 मार्च 2026 की डेडलाइन से पहले की अंतिम बड़ी समीक्षा बैठक है।
बैठक में दो प्रमुख मुद्दों पर खास तौर पर चर्चा हो रही है—
पहला, तय समय सीमा के भीतर देश को पूरी तरह सशस्त्र नक्सलवाद से मुक्त करने की रणनीति।
दूसरा, बस्तर समेत नक्सल प्रभावित इलाकों में वर्षों से अटके विकास कार्यों को रफ्तार देने का स्पष्ट रोडमैप।



