हर वर्ष की तरह इस बार भी काशी में गंगा का जलस्तर बढ़ने से शहर के हजारों लोग बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, करीब 50 हजार परिवारों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर शरण लेनी पड़ी है। गंगा का पानी न सिर्फ गली-मोहल्लों में घुस आया है, बल्कि नालों के उफान के कारण हालत और गंभीर हो गई है।
स्थानीय निवासियों ने बताया कि हर साल उन्हें यही परेशानी झेलनी पड़ती है। पानी उनके घरों में घुस जाता है और वे अपने जरूरी सामान लेकर सुरक्षित स्थानों पर जाने को मजबूर हो जाते हैं। राहत शिविरों में पर्याप्त जगह नहीं होने की वजह से लोग किराए पर कमरे लेकर रह रहे हैं। कुछ लोगों ने अस्थायी रूप से होटल या कमरों में शरण ली है।
लोगों की यही आस है कि जल्द ही गंगा का जलस्तर घटे और वे वापस अपने घर लौट सकें। जब तक जलस्तर सामान्य नहीं होता, तब तक उन्हें भारी आर्थिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। यह समस्या काशी में गंगा तट पर बसे लोगों की साल-दर-साल दोहराई जाने वाली पीड़ा बन चुकी है।







